मुंबई:
देश के शेयर बाजारों में निवेशकों की निगाह आगामी सप्ताह में वाहन कंपनियों और तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के शेयरों पर टिकी रहेगी।
आगामी सप्ताह में विदेशी संस्थागत निवेश के आंकड़ों, वैश्विक बाजारों के रुझान, डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल और तेल के मूल्य पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
निवेशकों की निगाह सरकारी तेल विपणन कंपनियों पर भी रहेगी, क्योंकि ये कंपनियां तेल मूल्य की समीक्षा करेंगी। तेल कंपनियां हर महीने के बीच में और आखिर में गत दो सप्ताह में आयातित तेल की औसत कीमत के आधार पर तेल मूल्य की समीक्षा करती हैं।
वाहन कंपनियों के शेयरों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी, क्योंकि 1 जनवरी से ये कंपनियां दिसंबर में हुई बिक्री के आंकड़े जारी करेंगी। जनवरी के दूसरे सप्ताह से कंपनियों के तीसरी तिमाही के परिणाम आने शुरू हो जाएंगे। परिणाम जारी करने का दौर फरवरी के दूसरे सप्ताह तक चलेगा।
निवेशक इन परिणामों के साथ मिलने वाली कंपनी की भावी रणनीति और आय की संभावना पर विशेष ध्यान रखेंगे, जो उन्हें भावी निवेश की दिशा अपनाने में मदद करेंगे। निवेशकों की निगाह अगले हफ्ते कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत पर भी टिकी रहेगी।
हाल के महीनों में तेल मूल्य में काफी गिरावट दर्ज की गई है। इसी का फायदा उठाते हुए सरकार ने डीजल मूल्य को नियंत्रण मुक्त भी कर दिया है। कच्चे तेल की कीमत घटने से सरकार को चालू खाता घाटा और ईंधन महंगाई दर कम करने में मदद मिलेगी। देश को अपनी जरूरत का 80 फीसदी तेल आयात करना पड़ता है। रुपये के अवमूल्यन से हालांकि तेल मूल्य गिरावट का फायदा सीमित रह सकता है।
अगले सप्ताह विमानन कंपनी स्पाइसजेट से संबंधित घटनाक्रमों पर भी निगाह रहेगी। कंपनी की उड़ानें पिछले दिनों तेल कंपनियों द्वारा साख आधार पर तेल देने से इनकार करने के कारण अवरुद्ध हो गई थी। कंपनी नकदी संकट से जूझ रही है। कंपनी के पुराने प्रमोटर द्वारा कंपनी में पूंजी निवेश के लिए आगे आने संबंधी खबर के बाद कंपनी के शेयरों में तेजी दर्ज की जा रही है। 1 जनवरी को दुनिया भर के कई शेयर बाजार बंद रहेंगे।