यह ख़बर 22 सितंबर, 2013 को प्रकाशित हुई थी

ऋण की लागत बढ़ने से घर खरीदने वाले वेतनभोगियों की परेशानी बढ़ी

खास बातें

  • अर्थव्यवस्था में सुस्ती, जीवनस्तर की लागत में बढ़ोतरी तथा कम वेतन वृद्धि के साथ ऊंची ब्याज दरों के चलते वेतनभोगी पेशेवरों की परेशानी बढ़ गई है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्व में संपत्ति में निवेश करने वाले वेतनभोगी अब अपनी संपत्तियों को बेच रहे है
मुंबई:

अर्थव्यवस्था में सुस्ती, जीवनस्तर की लागत में बढ़ोतरी तथा कम वेतन वृद्धि के साथ ऊंची ब्याज दरों के चलते वेतनभोगी पेशेवरों की परेशानी बढ़ गई है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्व में संपत्ति में निवेश करने वाले वेतनभोगी अब अपनी संपत्तियों को बेच रहे हैं।

एक सर्वेक्षण में कहा गया है कि 10 से 15 साल पहले संपत्ति में निवेश करने वाले लोगों के लिए अब अपने आवास ऋण को चुकाना मुश्किल हो रहा है। बढ़ती ब्याज दर तथा किराये से कम आमदनी की वजह से आवास ऋण अब काफी महंगा हो चुका है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि पुन: बिक्री के लिए रखी गई संपत्ति में पिछले छह माह में 30 फीसद से अधिक का इजाफा हुआ है।

प्रापर्टी पोर्टल हाउसिंग.सीओ.इन के सह-संस्थापक एवं विपणन प्रमुख अदवितिया शर्मा ने कहा, ‘आर्थिक सुस्ती से रीयल एस्टेट उद्योग प्रभावित हुआ है। वेतनभोगी पेशेवर जिन्होंने 5-6 साल पहले संपत्ति में निवेश किया था अब उसे बेचने की सोच रहे हैं।’

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डीटीजेड इंडिया के मुख्य कार्यपालक अंशुल जैन ने कहा, ‘मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में ऊंचे किराया दे सकने वाला किरायेदार ढूंढना एक चुनौती है। लोग सतर्क हो चुके हैं और वे कम किराये वाली संपत्ति ढूंढ रहे हैं।’