यह ख़बर 06 दिसंबर, 2012 को प्रकाशित हुई थी

जीएमआर को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, एयरपोर्ट वापस ले सकता है माले

खास बातें

  • संकटग्रस्त भारतीय कंपनी जीएमआर को झटका देते हुए सिंगापुर की एक अदालत ने गुरुवार को कहा कि मालदीव सरकार निजी कंपनी से माले हवाईअड्डा वापस ले सकती है।
सिंगापुर/माले:

संकटग्रस्त भारतीय कंपनी जीएमआर को झटका देते हुए सिंगापुर की एक अदालत ने गुरुवार को कहा कि मालदीव सरकार निजी कंपनी से माले हवाईअड्डा वापस ले सकती है।

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद वहीद के प्रेस सचिव मसूद इमाद ने माले में कहा ‘‘सिंगापुर की अपीलीय अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि मालदीव सरकार को हवाईअड्डा वापस लेने का अधिकार है।’’

उन्होंने कहा ‘‘मालदीव तय समय के अनुसार अधिग्रहण करेगा।’’ मालदीव ने 27 नवंबर को अप्रत्याशित कदम उठाते हुए जीएमआर को मिला तत्कालीन राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद के कार्यकाल के दौरान 50 करोड़ डॉलर का अनुबंध रद्द कर दिया था। यह परियोजना माले हवाईअड्डे के उन्नयन और नए टर्मिनल के निर्माण से जुड़ी है।

सरकार ने कहा था कि वह इस अनुबंध को इसलिए रद्द कर रही है कि इस पर संदेहास्पद स्थिति में हस्ताक्षर हुए और यह अवैध है लेकिन कंपनी ने इस आरोप का कड़ा विरोध किया।

परियोजना रद्द होने के बाद जीएमआर ने सिंगापुर उच्च न्यायालय को संपर्क किया जिसने अनुबंध को रद्द किए जाने पर स्थगन आदेश जारी किया। हालांकि मालदीव सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि वह नोटिस की अवधि खत्म होने के एक दिन बाद शनिवार को जीएमआर से हवाईअड्डे का अधिग्रहण करेगी।

आज के आदेश के बाद इमाद ने प्रेट्र से कहा ‘‘हम कानून का उल्लंघन करते हुए कुछ भी नहीं कर रहे। हम सिर्फ कानून का पालन कर रहे हैं। अब सिंगापुर की अदालत ने भी हमें अधिग्रहण प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है।’’ परियोजना के अनुबंध के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच मतभेद की स्थिति में या तो सिंगापुर या फिर ब्रिटेन का कानून लागू होगा।

जीएमआर मामले से अचम्भित भारत सरकार ने मालदीव से कहा कि इस पहल के द्विपक्षीय संबंधों पर गंभीर परिणाम होंगे। कानून का पालन न होने की स्थिति में सहायता कार्यक्रम को धीमा करने समेत कई विकल्पों पर विचार कर किया जा रहा है।

भारत ने स्वीकार किया कि मालदीव सरकार का माले हवाईअड्डा निर्माण से जुड़ा जीएमआर का अनुबंध रद्द करने का फैसला घरेलू मामला है लेकिन वह इस बात से चिंतित है कि इसके बहाने भारत विरोधी रुख को हवा दी जा रही है।

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सूत्रों ने बताया कि हवाईअड्डा अनुबंध रद्द मामले में कुछ वाह्य तत्वों की भूमिका की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। हालांकि, अब तक स्पष्ट रूप से चीन के शामिल होने के संबंध में कोई साक्ष्य नहीं मिला है।