खास बातें
- बाजार नियामक सेबी ने गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) को बैंक की स्वर्ण बचत योजनाओं में निवेश की अनुमति दे दी। निष्क्रिय पड़े मूल्यवान धातु के उत्पादक कार्यों में उपयोग के मकसद से सेबी ने यह मंजूरी दी है।
मुंबई: बाजार नियामक सेबी ने गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) को बैंक की स्वर्ण बचत योजनाओं में निवेश की अनुमति दे दी। निष्क्रिय पड़े मूल्यवान धातु के उत्पादक कार्यों में उपयोग के मकसद से सेबी ने यह मंजूरी दी है।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने म्यूचुअल फंड के गोल्ड ईटीएफ को स्वर्ण बचत योजनाओं (जीडीएस) में निवेश की अनुमति दे दी है। यह मंजूरी कुछ शर्तों के साथ दी गई है। इसमें जीडीएस में कुल निवेश ऐसी योजनाओं के अंतर्गत प्रबंधन अधीन परिसंपत्ति का 20 प्रतिशत से अधिक नहीं होने की बात शामिल है।
रिजर्व बैंक की एक समिति के अनुसार करीब 20,000 टन सोना लोगों के पास निष्क्रिय पड़ा है। केंद्रीय बैंक निष्क्रिय पड़े सोने को उत्पादक कार्यों में इस्तेमाल करने के साथ आयात के लिये मांग पर रोक भी लगाना चाहता है।
सेबी के दिशानिर्देशों के अनुसार जीडीएस में निवेश करने से पहले म्यूचुअल फंड को निवेश से संबंधित लिखित में नीति तैयार करनी होगी जिसे ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी के निदेशक मंडल तथा न्यासियों की मंजूरी हो।
सेबी ने परिपत्र में कहा, ‘नीति के तहत म्यूचुअल फंड को किसी भी बैंक के जीडीएस में प्रत्येक निवेश प्रस्ताव के लिए अपने न्यासियों से पूर्व में मंजूरी लेनी होगी।’
साथ ही म्यूचुअल फंड को साल में कम-से-कम साल में एक बार नीति की समीक्षा करनी होगी।
पिछले महीने वित्त मंत्रालय ने गोल्ड ईटीएक को स्वर्ण बचत योजनाओं से जोड़े जाने की योजना की घोषणा की थी।
चालू खाते के बढ़ते खाते के मद्देनजर सोने का बढ़ता आयात सरकार के लिए चिंता का कारण है।
चालू वित्त वर्ष में दिसंबर तक 38 अरब डॉलर मूल्य के सोने का आयात हुआ है। वित्त वर्ष 2011-12 में 56.5 अरब डॉलर मूल्य का आयात हुआ था।