खास बातें
- उच्चतम न्यायालय ने रैनबैक्सी लेबोरेटरीज लिमिटेड के खिलाफ घटिया दवाएं बनाने और बेचने के आरोप में दायर याचिका सबूत न होने की वजह से आज खारिज कर दी।
नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने रैनबैक्सी लेबोरेटरीज लिमिटेड के खिलाफ घटिया दवाएं बनाने और बेचने के आरोप में दायर याचिका सबूत न होने की वजह से आज खारिज कर दी।
इस निर्णय के बावजूद न्यायमूर्ति एके पटनायक और न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की पीठ ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता एमएल शर्मा से कहा कि यदि उन्हें कुछ साक्ष्य मिल जाएं तो वे फिर से याचिका दायर कर सकते हैं। याचिका में आरोप लगाया गया था कि कंपनी घटिया दवाओं का उत्पादन और बिक्री करती है।
पीठ ने कहा कि वह अमेरिकी अदालत द्वारा कंपनी के खिलाफ दिए गए फैसले के आधार पर इस याचिका पर फैसला नहीं दे सकती।
पीठ ने कहा, आपकी दलील अमेरिका की अदालती प्रक्रिया पर आधारित है। यह हमारे क्षेत्राधिकार में नहीं आता। हमें ऐसे साक्ष्य दिखाएं कि भारत में ये चीजें हो रही हैं और इससे लोगों के जीने का अधिकार प्रभावित हो रहा है। रैनबैक्सी के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य कहां हैं?
न्यायालय ने कहा, इस संबंध में कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह सिद्ध हो सके कि रैनबैक्सी के किसी भी कारखाने में विनिर्मित की गई दवाएं घटिया, मिलावटी, नकली है और इन दवावों पर कानून पाबंदी है। ऐसे किसी प्रमाण के अभाव में इस याचिका पर सुनवाई नहीं की जा सकती है।
शर्मा ने अपनी याचिका में दलील दी थी अमेरिकी खाद्य एवं दवा प्रशासन (यूएसएफडीए) ने कंपनी पर मिलावटी दवाएं बनाने और बिक्री के संबंध में 50 करोड़ डॉलर का जुर्माना लगाया है। इसमें कंपनी की हिमाचल प्रदेश के पोंटा साहिब और मध्यप्रदेश के देवास के कारखानों को बंद कराने की भी मांग की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि रैनबैक्सी ने अमेरिका में मिलावटी दवाओं की आपूर्ति का दोष स्वीकार किया और कंपनी पर भारी-भरकम जुर्माना लगाया गया। इसके बावजूद भारत में केंद्र सरकार ने कंपनी द्वारा बनाई गई दवाओं को प्रतिबंधित करने के लिए कोई पहल नहीं की।
शर्मा ने इस मामले में अमेरिकी जांच के परिणाम आने के बाद भी कंपनी को भारत में दवा बेचने की अनुमति देने के खिलाफ भारतीय दवा नियामक केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की भी मांग की थी।