यह ख़बर 19 सितंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

सीबीआई की अपील पर सत्यम के पूर्व अधिकारियों को नोटिस

खास बातें

  • सत्यम घोटाला मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई की अपील पर रामालिंगा राजू और पूर्व अधिकारियों को नोटिस जारी किया।
नई दिल्ली:

सत्यम कम्प्यूटर्स घोटाला मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अपील पर कम्पनी के संस्थापक बी. रामालिंगा राजू और पूर्व अधिकारियों को नोटिस जारी किया। सीबीआई ने मामले की सुनवाई पूरी करने की अवधि दो माह बढ़ाने के लिए आवेदन किया है। सीबीआई ने न्यायालय से 26 अक्टूबर 2010 के उसके आदेश में भी सुधार करने का अनुरोध किया, जिसमें न्यायालय ने सुनवाई प्रक्रिया के 31 जुलाई 2011 तक पूरी नहीं होने की स्थिति में रामालिंगा राजू, उनके भाई बी. रामा राजू और कम्पनी के चार पूर्व अधिकारियों को अदालत में जमानत याचिका लगाने की अनुमति दी थी। अदालत की नोटिस रामालिंगा राजू के साथ उनके भाई रामा राजू और चार पूर्व अधिकारियों को भेजा गया। चारों अधिकारियों में शामिल हैं कम्पनी के पूर्व उपाध्यक्ष जी. रामाकृष्णा, पूर्व वरिष्ठ प्रबंधक डी. वेंकटपति राजू, पूर्व सहायक प्रबंधक सी.एस. श्रीसैलम और कम्पनी के आंतरिक लेखांकन के पूर्व प्रमुख वीएसपी गुप्ता। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश दलबीर भंडारी और दीपक वर्मा की खंडपीठ ने सीबीआई के आवेदन को सत्यम के चार पूर्व अधिकारियों की जमानत याचिका के साथ संलग्न करते हुए नोटिस जारी किया। न्यायालय ने कहा कि सीबीआई की अपील पर नोटिस का जवाब दो सप्ताह के भीतर प्राप्त हो जाना चाहिए। इस महीने की 16 तारीख को सत्यम के चार अधिकारियों ने जमानत की अपील दायर की थी। इसमें कम्पनी के पूर्व प्रबंध निदेशक और रामालिंगा राजू के भाई रामा राजू शामिल हैं। सत्यम कम्प्यूटर सर्विसेज लिमिटेड की खाता-बही में की गई हेराफेरी भारत के इतिहास का एक सबसे बड़ा कारपोरेट घोटाला था। सर्वोच्च न्यायालय ने 26 अक्टूबर 2010 को हैदराबाद की एक अदालत को मामले की सुनवाई प्रतिदिन आधार पर करते हुए इसे 31 जुलाई 2011 तक पूरा करने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि यदि सुनवाई 31 जुलाई तक पूरी नहीं होती है, तो आरोपियों को आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय में जमानत याचिका लगाने की आजादी होगी।


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