यह ख़बर 13 दिसंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर से सम्भला

खास बातें

  • औद्योगिक उत्पादन में गिरावट के चलते डॉलर की तुलना में रुपया मंगलवार को 53.51 रुपये तक पहुंच गया, जो उसका अब तक का निम्नतम स्तर है।
New Delhi:

देश की मुद्रा रुपये के मूल्य में मंगलवार को भी गिरावट देखी गई। मंगलवार को रुपया एक डॉलर के मुकाबले 53.50 रुपये के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। बाद में हालांकि रुपये की स्थिति थोड़ी सम्भली लेकिन डॉलर की मांग बढ़ने की वजह से रुपये में कमजोरी बनी हुई है। रुपये के अवमूल्यन से तेल का आयात और महंगा हो सकता है और तेल विपणन कम्पनियां पेट्रोल की कीमत बढ़ाने के लिए बाध्य हो सकती हैं, जो आखिरकार महंगाई बढ़ाने में योगदान कर सकता है। अंतरबैंक विदेशी विनिमय में रुपया मंगलवार को डॉलर के मुकाबले 53.10 के स्तर पर खुला। पिछले दिन यह डॉलर के मुकाबले 52.84/85 पर बंद हुआ था। कारोबार के दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले 53.50 रुपये के निचले स्तर पर चला गया, बाद में हालांकि स्थिति थोड़ी सम्भली। रुपये की स्थिति सम्भालने में आंशिक योगदान मंगलवार को शेयर बाजारों में दर्ज की गई तेजी का भी रहा। शाम 5.20 बजे रुपया 53.18 रुपये प्रति डॉलर पर था। अक्टूबर माह में औद्योगिक उत्पादन में 5.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जो विश्लेषकों की उम्मीद से अधिक बुरी थी। इसके कारण सोमवार को मुद्रा बाजार में रुपये में गिरावट को बल मिला था। शेयर बाजारों में गिरावट के सिलसिले के बीच विदेशी निवेशकों द्वारा की जा रही बिकवाली के कारण भी डॉलर की मांग में वृद्धि हो रही है और रुपये के मूल्य में गिरावट हो रही है। पिछले चार महीनों में रुपये के मूल्य में 16 फीसदी की गिरावट हो चुकी है। रुपये के मूल्य में इस गिरावट के साथ ही देश की नजरें भारतीय रिजर्व बैंक पर टिक गई हैं कि क्या वह फिर रुपये को सम्भालने के लिए बाजार में हस्तक्षेप करेगा। रिजर्व बैंक के आंकड़े के मुताबिक बैंक ने रुपये के मूल्य को सम्भालने के लिए सितम्बर और अक्टूबर में क्रमश: 84.5 करोड़ डॉलर और 94.3 करोड़ डॉलर की बिकवाली की थी। इन दोनों ही महीनों में बैंक ने एक भी डॉलर नहीं खरीदा। विश्लेषकों के मुताबिक रुपये पर दबाव आगे कुछ और समय तक बना रहेगा, क्योंकि देश का चालू खाता घाटा अप्रैल-जून तिमाही में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में बढ़कर 14.1 अरब डॉलर हो गया है। मौजूदा कारोबारी साल में चालू खाता घाटा 54 अरब डॉलर रहने का अनुमान है।


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