यह ख़बर 08 फ़रवरी, 2012 को प्रकाशित हुई थी

‘रिलायंस इंफ्रा के कर्मचारियों ने स्वान एवं अन्य 4 फर्में बनाई’

खास बातें

  • तांबावाला ने अदालत में कहा कि शाहिद उस्मान के नेतृत्ववाली दूरसंचार कंपनी स्वान टेलीकाम की स्थापना रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड या इसके समूह की कंपनियों के कर्मचारियों द्वारा की गई थी।
नई दिल्ली:

2जी स्पेक्ट्रम आबंटन मामले में अभियोजन पक्ष के एक गवाह और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के वरिष्ठ कार्यकारी उपाध्यक्ष (लेखा एवं वित्त) आशीष तांबावाला ने अदालत में कहा कि शाहिद उस्मान के नेतृत्ववाली दूरसंचार कंपनी स्वान टेलीकाम की स्थापना रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड या इसके समूह की कंपनियों के कर्मचारियों द्वारा की गई थी।

उन्होंने गवाही दी कि जिराफ कंसल्टेंसी सर्विसेज, जेब्रा कंसल्टेंट्स, पैरट कंसल्टेंट्स, स्वान कैपिटल और टाइगर ट्रेडर्स प्राइवेट लि. की स्थापना एडीएजी समूह के कर्मचारियों द्वारा की गई थी। आरोप है कि ये सभी रिलायंस एडीए समूह की सहयोगी फर्में हैं। उन्होंने कहा, ‘यह सही है कि उक्त पांच कंपनियों (स्वान कैपिटल, टाइगर ट्रेडर्स, जिराफ, जेब्रा और पैरट) की स्थापना रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड या इसके समूह की कंपनियों के कर्मचारियों द्वारा की गई थी।’ तांबावाला ने कहा, ‘यह भी सही है कि उक्त पांच कंपनियों के बैंक खाते खोलने की प्रक्रिया रिलायंस इंफ्रा के कंपनी सचिव रमेश शेनाय द्वारा शुरू की गई थी।’

तांबावाला ने कहा कि स्वान कैपिटल लिमिटेड ने अपना नाम बदलकर स्वान टेलीकाम कर लिया और इसके बाद इसका नाम बदलकर एतिसलात डीबी टेलीकाम लिमिटेड कर दिया गया। इसी तरह, टाइगर ट्रेडर्स ने अपना नाम बदलकर टाइगर ट्रस्टीज प्राइवेट लिमिटेड कर लिया। जिरह के दौरान तांबावाला ने कहा कि रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड दूरसंचार में कारोबार नहीं करती। उन्होंने कहा कि स्वान कैपिटल का नाम बदलकर स्वान टेलीकाम किए जाने के बाद भी वह कंपनी के अधिकृत हस्ताक्षरी बने रहे।

उन्होंने कहा, ‘मुझे कभी पता नहीं चला कि जब स्वान कैपिटल का नाम बदलकर स्वान टेलीकाम किया गया तो दूरसंचार कारोबार का अधिग्रहण स्वान टेलीकाम द्वारा कर लिया गया है, भले ही बार बार कंपनी का नाम बदले जाने की जानकारी मुझे थी।’ तांबावाला को अदालत में विभिन्न दस्तावेज दिखाए गए जिसके बारे में उन्होंने कहा कि रिलायंस इफ्रास्ट्रक्चर ग्रुप की कंपनियों के कर्मचारी आशीष करयेकर और प्रकाश राठौड़ जिराफ कंसल्टेंसी, जेब्रा कंसल्टेंट्स और पैरट कंसल्टेंट्स के निदेशक थे।

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com

उन्होंने कहा कि 2जी मामले में आरोपी और रिलायंस एडीए समूह के अध्यक्ष सुरेन्द्र पिपारा भी इनमें से कुछ कंपनियों के निदेशक थे। अदालत में तांबावाला के अलावा अभियोजन पक्ष के एक अन्य गवाह निलेश आर दोषी के बयान भी दर्ज किए गए। पेशे से चार्टर्ड एकाउंटेंट दोषी 2006 में रिलायंस एडीए समूह में बतौर सलाहकार नियुक्त किए गए थे। दोषी ने कहा कि रिलायंस एडीए समूह में बतौर सलाहकार नियुक्त किए जाने के बाद उन्हें कुछ कंपनियों का निदेशक नियुक्त किया गया जिनमें पैरट, टाइगर और जेब्रा शामिल हैं।