यह ख़बर 26 फ़रवरी, 2013 को प्रकाशित हुई थी

'मानदंडों पर खरा उतरने पर रीयल्टी, ब्रोकरेज कंपनियां भी चला सकती हैं बैंक'

खास बातें

  • रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर केसी चक्रवर्ती ने कहा कि अगर जमीन-जायदद के विकास से जुड़ी रीयल्टी कंपनियां और शेयर ब्रोकिंग कंपनियां अंतिम दिशानिर्देशों में उल्लेखित मानदंडों को उपयुक्त तरीके से पूरा करती हैं तो केंद्रीय बैंक उन्हें बैंक चलाने की अनुमति देने
मुंबई:

रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर केसी चक्रवर्ती ने कहा कि अगर जमीन-जायदद के विकास से जुड़ी रीयल्टी कंपनियां और शेयर ब्रोकिंग कंपनियां अंतिम दिशानिर्देशों में उल्लेखित मानदंडों को उपयुक्त तरीके से पूरा करती हैं तो केंद्रीय बैंक उन्हें बैंक चलाने की अनुमति देने को तैयार है।

यह पूछे जाने पर कि क्या रीयल एस्टेट तथा ब्रोकरेज कंपनियों को बैंक खोलने की अनुमति दी जाएगी क्योंकि अंतिम दिशानिर्देश में इस बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है, ‘ये सभी कानूनी कारोबार हैं... अगर वे सभी जरूरतों, चिंताओं को पूरा करते हैं तो उन्हें कैसे मना किया जा सकता है... निश्चित रूप से अगर यह दिशानिर्देश में नहीं है, तब यह खुला हुआ है।’

एक कार्यक्रम के दौरान संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने यह बात कही। पिछले शुक्रवार को नए बैंकिंग लाइसेंस के लिए अंतिम दिशानिर्देश जारी करने के बाद नियामक की तरफ से यह पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया है।

रिजर्व बैंक ने अगस्त 2011 में जो मसौदा दिशानिर्देश जारी किया था उसमें रीयल्टी तथा ब्रोकरेज कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया गया था लेकिन अंतिम दिशानिर्देश में ऐसी कोई बात नहीं है।

यह पूछे जाने पर कि कितने लाइसेंस जारी किए जा सकते हैं, डिप्टी गवर्नर ने कहा कि नए बैंकों की संख्या योग्य उम्मीदवारों पर निर्भर करेगी और अभी इस बारे में कोई स्पष्ट संख्या बताना जल्दबाजी होगी।

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चक्रवर्ती ने कहा, ‘पहले, यह देखना पड़ेगा कि कितने लोग योग्य हैं, कितने मानदंडों को पूरा करते हैं। अगर कोई भी उपयुक्त नहीं पाया जाता है तो लाइसेंस देने का क्या मतलब है। अत: अभी इस बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी।’