केंद्र सरकार को 99 हजार करोड़ ट्रांसफर करेगा RBI, कोरोनाकाल के आर्थिक संकट में बड़ी राहत

आरबीआई के बोर्ड ने 31 मार्च 2021 को बीते नौ महीने की लेखा अवधि के लिए सरकार को अधिशेष यानी सरप्लस के रूप में 99,122 करोड़ रुपए के ट्रांसफर को मंजूरी दी है.

केंद्र सरकार को 99 हजार करोड़ ट्रांसफर करेगा RBI, कोरोनाकाल के आर्थिक संकट में बड़ी राहत

RBI 99,122 करोड़ का सरप्लस सरकार को करेगा ट्रांसफर.

खास बातें

  • आरबीआई बाजार में परिचालन, निवेश और नोट की प्रिंटिंग से लाभ लेता है
  • आरबीआई बैंकों को उधार में रकम भी देता है और जमा भी करता है
  • रिजर्व बैंक हर साल ऐसे ही लाभांश का भुगतान केंद्र को करता है
मुंबई:

कोरोना काल में आर्थिक संकट (Corona Economy Crisis ) से जूझ रही केंद्र सरकार को शुक्रवार बड़ी राहत मिली है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने केंद्र सरकार को अधिशेष के तौर पर 99 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम ट्रांसफर करने का फैसला किया है.भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बोर्ड ने 31 मार्च 2021 को बीते नौ महीने की लेखा अवधि के लिए सरकार को अधिशेष यानी सरप्लस के रूप में 99,122 करोड़ रुपये के ट्रांसफर को मंजूरी दी है. केंद्र सरकार को अधिशेष हस्तांतरित करने का निर्णय आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल की शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरि/s हुई बैठक में लिया गया.

आरबीआई बोर्ड ने अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 की दूसरी लहर के प्रकोप को कम करने के लिए वर्तमान आर्थिक स्थिति, वैश्विक और घरेलू चुनौतियों और हाल के नीतिगत उपायों की भी समीक्षा की. रिजर्व बैंक के लेखा वर्ष को अप्रैल-मार्च (पहले जुलाई-जून) में बदलने के साथ, बोर्ड ने नौ महीने (जुलाई 2020-मार्च 2021) की अवधि के दौरान आरबीआई के कामकाज पर चर्चा की. कोरोना की दूसरी लहर के दौरान आर्थिक गतिविधियों में लॉकडाउन और अन्य पाबंदियों के कारण सुस्ती दिखाई पड़ रही है. ऐसे में सरकार वित्तीय संकट के मोर्चे पर झेल रही है. लेकिन आरबीआई के इस फैसले से सरकार को धन जुटाने के मोर्चे पर बड़ी मदद मिलेगी. 

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बैठक के दौरान गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में बोर्ड ने संक्रमण अवधि के लिए रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट और खातों को मंजूरी दी. बयान के मुताबिक, ‘बोर्ड ने 31 मार्च 2021 को समाप्त नौ महीने (जुलाई 2020-मार्च 2021) की लेखा अवधि के लिए केंद्र सरकार को अधिशेष के रूप में 99,122 करोड़ रुपये के हस्तांतरण को मंजूरी दी, जबकि आकस्मिक जोखिम बफर को 5.50 प्रतिशत पर बनाए रखने का निर्णय लिया.'

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बैठक में डिप्टी गवर्नर महेश कुमार जैन, माइकल देवव्रत पात्रा, एम राजेश्वर राव और टी रवि शंकर शामिल हुए. केंद्रीय बोर्ड के अन्य निदेशक एन चंद्रशेखरन, सतीश के मराठे, एस गुरुमूर्ति, रेवती अय्यर और सचिन चतुर्वेदी भी बैठक में शामिल हुए.
वित्तीय सेवा विभाग के सचिव देवाशीष पांडा और आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव अजय सेठ ने भी बैठक में भाग लिया.