खास बातें
- राष्ट्रपति ने संसद के संयुक्त अधिवेशन में अपने अभिभाषण में आर्थिक चुनौतियों और उनसे निपटने की सरकार की प्रतिबद्धताओं पर प्रकाश डाला।
New Delhi: सरकार ने महंगाई पर अंकुश लगाने और ऊंची वृद्धि दर के लक्ष्य को आर्थिक क्षेत्र की अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखते हुए कहा कि वह देश में आर्थिक सुधारों की गाड़ी को आगे बढ़ाएगी, ताकि देसी-विदेशी निवेश में तेजी लाई जा सके। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने संसद के बजट सत्र के पहले दिन दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन में अपने अभिभाषण में देश की आर्थिक चुनौतियों और उनसे निपटने की अपनी सरकार की प्रतिबद्धताओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, प्रतिकूल वैश्विक वातावरण के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन हमें आत्मसंतुष्ट नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता महंगाई, खासकर खाने-पीने की वस्तुओं की ऊंची कीमत पर लगाम लगाना तथा अर्थिक वृद्धि की रफ्तार को बनाए रखना है। इस दोहरे उद्येश्य की प्राप्ति के लिए हमें व्यापक स्तर पर आर्थिक सुधारों की गति को बनाए रखना जरूरी है। उल्लेखनीय है कि बीमा, बैंकिंग, पेंशन, खुदरा बाजार, कृषि, रक्षा उत्पादन, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर तथा प्रशासनिक क्षेत्र में सुधार के प्रस्तावों पर आगे की कार्रवाई की लंबे समय से प्रतीक्षा है। गौरतलब है कि जहां एक तरफ विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्था अभी वित्तीय संकट से पूरी तरह नहीं उबर पाई है, वहीं चालू वित्तवर्ष 2010-11 में आर्थिक वृद्धि 8.6 फीसदी रहने का अग्रिम अनुमान जताया गया है। इसी प्रकार, 2009-10 में आर्थिक वृद्धि 8.0 फीसदी था। राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल उच्च आर्थिक वृद्धि ही नहीं है, बल्कि समाज के गरीब, कमजोर और वंचित वर्गों के लिए आर्थिक विकास में उपयुक्त भागीदारी को सुनिश्चित करना भी हमारा प्रमुख उद्देश्य है। प्रतिभा ने कहा, सरकार ने महंगाई से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसमें महत्वपूर्ण वस्तुओं की आपूर्ति में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए आयात व्यवस्था को उदार बनाने के साथ ही खाद्य तेल और दाल जैसी जरूरी वस्तुओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाना शामिल हैं। राष्ट्रपति ने कहा, इसके अलावा महंगाई से आम लोगों को राहत दिलाने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से रियायती मूल्यों पर दाल और अन्य जरूरी राशन की आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने कहा, बेमौसम बारिश की वजह से सब्जी के दाम बढ़े, जिसका असर खाद्य मुद्रास्फीति पर पड़ा। नई फसल आने के बाद कीमत नीचे आएंगी। हालांकि राष्ट्रपति ने कहा कि उत्पादकता और उत्पादन में वृद्धि से ही इस समस्या का दीर्घकालीन हल संभव है।