यह ख़बर 18 अगस्त, 2011 को प्रकाशित हुई थी

खाद्य मुद्रास्फीति का मौजूदा स्तर स्वीकार्य नहीं : प्रणब

खास बातें

  • वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने उम्मीद जताई की सरकार की नीतियों तथा बेहतर मानसून से खाद्य कीमतों के मोर्चे पर आगे चलकर कुछ राहत मिलेगी।
New Delhi:

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि 9 प्रतिशत से ऊपर चल रही खाद्य मुद्रास्फीति स्वीकार्य नहीं है। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई की सरकार की नीतियों तथा बेहतर मानसून से कीमतों के मोर्चे पर आगे चलकर कुछ राहत मिलेगी। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, नौ प्रतिशत की खाद्य मुद्रास्फीति स्वीकार्य नहीं है। मुझे उम्मीद है कि कुछ कृषि जिंसों की आपूर्ति बाधाओं को खत्म करने के लिए उठाए गए कदमों तथा मानसून अच्छा रहने पर खाने पीने की वस्तुओं तथा अन्य आवश्यक सामग्रियों के दामों में आगे और गिरावट आएगी। 6 अगस्त को समाप्त सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति घटकर 9.03 प्रतिशत पर आ गई है, जो इससे पिछले सप्ताह 9.90 प्रतिशत पर थी। वित्त मंत्री ने कहा कि फरवरी, 2010 के 22 प्रतिशत के स्तर से खाद्य मुद्रास्फीति अब काफी नीचे आ चुकी है, पर अभी भी यह काफी ऊपर है। मुखर्जी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालात अनुकूल नहीं हैं, खासकर जिंसों की कीमतों के मोर्चे पर। ईंधन सहित अन्य जिंसों के दाम ऊंचे हैं। इससे औद्योगिक कच्चे माल, अन्य जिंसां तथा ईंधन कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार इस बात के प्रयास कर रही है कि महंगाई की दर को नीचे लाया जाए। वित्त मंत्री ने कहा, मुझे उम्मीद है कि भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति तथा वित्त मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदमों से मुद्रास्फीति के मोर्चे पर कुछ राहत मिलेगी। सरकार ने खानेपीने की वस्तुओं के दामों को नीचे लाने के लिए कई उपाय किए हैं। गेहूं, चावल और दालों पर आयात शुल्क घटाया गया है, गैर बासमती चावल के निर्यात पर रोक है तथा चावल, उड़द और तुल दाल के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगाया गया है।


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