यह ख़बर 05 जुलाई, 2011 को प्रकाशित हुई थी

वित्तीय घाटा लक्ष्य में बदलाव की जरूरत नहीं : प्रणब

खास बातें

  • प्रणब ने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों पर शुल्क में कमी की वजह से होने वाले राजस्व घाटे के बावजूद वित्तीय घाटे के लक्ष्य में बदलाव नहीं किया जाएगा।
नई दिल्ली:

केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने मंगलवार को कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों पर शुल्क में कमी की वजह से होने वाले राजस्व घाटे के बावजूद वित्तीय घाटे के लक्ष्य में बदलाव नहीं किया जाएगा। मुखर्जी ने एक सवाल के जवाब में संवाददाताओं से कहा कि सरकार लक्ष्य पूरा करने की कोशिश कर रही है। उनसे पूछा गया था कि खर्च में वृद्धि और उत्पाद शुल्क में कमी करने के कारण राजस्व को होने वाले नुकसान को देखते हुए क्या सरकार वित्तीय घाटे के लक्ष्य में बदलाव के बारे में सोच रही है? सरकार ने इस वर्ष वित्तीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.6 फीसदी तक सीमित करने का लक्ष्य रखा है। पिछले वर्ष यह लक्ष्य 5.1 फीसदी था। वित्त मंत्री ने कहा कि उन्हें फरवरी में केंद्रीय बजट में घोषित वित्तीय घाटे के लक्ष्य के पूरा होने की उम्मीद है। डीजल, मिट्टी के तेल और रसोई गैस के मूल्य में हुई वृद्धि के असर से आम आदमी को बचाने के लिए सरकार ने हाल में पेट्रोलियम उत्पादों पर आयात शुल्क में पांच फीसदी की कटौती की थी। सरकार ने डीजल पर उत्पाद शुल्क भी 4.6 रुपये प्रति लीटर से घटाकर दो रुपये कर दिया। इसके कारण राजस्व को 4,900 करोड़ रुपये का नुकसान होने की उम्मीद है। सरकार ने कुछ दिनों पहले डीजल, मिट्टी के तेल और रसोई गैस की कीमतों में क्रमश: तीन रुपये प्रति लीटर, दो रुपये प्रति लीटर और 50 रुपये प्रति सिलेंडर की वृद्धि की थी।


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