खास बातें
- रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर वाई वी रेड्डी ने कहा है कि मुद्रास्फीति प्रबंधन को सिर्फ मौद्रिक प्राधिकरणों के भरोसे नहीं छोड़ा जाना चाहिये बल्कि इसके लिए सरकार की ओर से भी सूझबूझ वाले उपाय किये जाने की आवश्यकता है।
मुम्बई: रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर वाई वी रेड्डी ने कहा है कि मुद्रास्फीति प्रबंधन को सिर्फ मौद्रिक प्राधिकरणों के भरोसे नहीं छोड़ा जाना चाहिये बल्कि इसके लिए सरकार की ओर से भी सूझबूझ वाले उपाय किये जाने की आवश्यकता है।
मुद्रास्फीति पर अंकुश के बारे में विचार पूछने पर रेड्डी ने कहा ‘मुद्रास्फीति सिर्फ मौद्रिक क्षेत्र से जुड़ा मुद्दा नहीं है इसके लिए राजकोषीय पक्ष की तरफ से भी सूझबूझ भरे उपाय किये जाने की जरूरत है।’
यह पूछने पर कि मुद्रास्फीति नियंत्रण के लिए सभी तरह के कर्जों पर नियंत्रण होना चाहिए या चुनिंदा वर्ग में कटौती होनी चाहिए, रेड्डी ने चुनिंदा क्षेत्रों में ऋण प्रवाह पर अंकुश का विकल्प चुना जिसकी सलाह आरबीआई के पूर्व गवर्नर आईजी पटेल ने बहुत पहले दी थी। रेड्डी ने सोमवार शाम पटेल की पुस्तक का विमोचन किया।
रेड्डी ने कहा मौद्रिक नीति के तरीकों से आमतौर पर ऋण की लागत और उपलब्धता प्रभावित होती है। लेकिन यदि अर्थव्यवस्था के हालात ऐसे हैं कि कुछ क्षेत्रों में विस्तार की जरूरत है जबकि कुछ क्षेत्र में ऋण में कटौती की तो ऐसे में मौद्रिक नियंत्रण के लिये कुछ क्षेत्रों में चयन के विकल्प को अपनाया जाना चाहिए।
आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने कहा यह जटिल परिस्थिति है। मौद्रिक नीति से जुड़ी पहल (मुद्रास्फीति नियंत्रण) के लिए गुंजाइश बहुत कम है। उच्च ब्याज दर से प्रभाव कम होता है। लेकिन जो राजकोषीय स्थिति है ऐसे में कोई अस्थिरता न पैदा हो यह सुनिश्चित करने के लिए सब कुछ करने की जरूरत है।