क्या हैं म्यूचुअल फंड, क्यों निवेश करना है नफे का सौदा; एक गाइड...

क्या हैं म्यूचुअल फंड, क्यों निवेश करना है नफे का सौदा; एक गाइड...

क्या हैं म्यूचुअल फंड, क्यों निवेश करना है नफे का सौदा; एक गाइड... (प्रतीकात्मक फोटो)

नई दिल्ली:

ऐसा कई बार होता है कि जब आप किसी वित्तीय सलाहकार के पास जाते हैं तो वह आपको अपने पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाइ करने के लिए कहता है. इसका मतलब हुआ कि आप निवेश के पैसे का एक हिस्सा शेयर बाजार, एक हिस्सा प्रॉपर्टी और एक हिस्सा बैंकों की मियादी दरों या पीपीएफ जैसी स्कीम्स पर लगाएं. जानकार म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह भी देते हैं. शेयर बाज़ार में निवेश का एक बढ़िया विकल्प हैं म्यूचुअल फंड. इसमें फंड को अलग-अलग तरह के शेयरों में लगाया जाता है और यह निवेश बाजार के विशेषज्ञ करते हैं.

दरअसल जानकारों की राय में निवेशक के पैसे का शेयर बाज़ार से ज़्यादा सुरक्षित निवेश इसमें होता है. शेयरों में सीधा पैसा लगाने से नुकसान की आशंका बनी रहती है. इसमें नियमित तौर पर छोटी राशि भी लगाई जा सकती है. जैसे कि चार से पांच हजार रुपये प्रतिमाह निवेश अच्छा विकल्प हो सकता है. इस फंड को प्रोफेशनल एक्सपर्ट मैनेज करते हैं. आमतौर पर फंड मैनेजर अपनी मामूली फीस लेता है. यह फीस दो से तीन फीसदी होती है.

देखा जाए तो बैंक में निवेश से बेहतर म्यूचुअल फंड में निवेश. क्योंकि बैंक में पैसा सुरक्षित भले हो लेकिन ब्याज दर 7% के इर्द गिर्द मिलती है. बैंक से मिलने वाला रिटर्न महंगाई के असर से बचाने में नाकाम रहता है. बैंक में रखने से पैसे की खरीद की ताकत ज्यादा नहीं बढ़ पाती है. इसलिए सलाह तो यह है कि लंबे निवेश के लिए बैंक की बजाय म्यूचुअल फंड अच्छा विकल्प है. शॉर्ट टर्म निवेश के लिए बैंक में पैसा जरूरत के मुताबिक रख सकते हैं.

मगर, जानकार मानते हैं कि म्यूचुअल फंड के लिए संयम बरतें. क्योंकि इनमें निवेश आपाधापी का मामला नहीं है. दीर्घकालीन निवेश के लिए ही इसमें निवेश करें. मगर जब फंड मैनेजर पैसा लगा दे तो आप बाज़ार की उठापटक पर ध्यान मत लगाइए, ऐसा वित्तीय जानकार मानते हैं. लंबे समय के लिए नियमित पैसा लगाइए, तभी औसत बढ़त का फायदा होगा. पिछले कुछ दिन या महीनों के प्रदर्शन के हिसाब से फंड का चुनाव न करें और न कि किसी प्रकार मित्र मंडली के दबाव में आकर निर्णय न लें. साथ ही, फंड में उतना ही पैसा डालें जो आप आराम से लंबे समय तक डाले रह सकते हैं और इस पैसे की आपको एकदम जल्दी ही जरूरत नहीं पड़ेगी.

अब यदि इनकम टैक्स छूट की बात की जाए तो 80 सी के तहत डेढ़ लाख रुपये तक निवेश पर टैक्स छूट मिलती है. अगर डेढ़ लाख रुपये और हैं तो टैक्स सेविंग फंड पर लगाएं. मगर टैक्स सेविंग फंड में तीन साल तक पैसा नहीं निकाल सकते. यदि टैक्स बचाने के लिए निवेश को लेकर एमएफ में निवेश नहीं कर कर रहे हैं तो बैलेंस्ड फंड में निवेश करें. फंड मैनेजर की सलाह से ऐसा फंड चुनें जिसमें बहुत उतार-चढ़ाव न हो. जानकारों की राय में बैलेंस्ड फंड में 70% इक्विटी, 30% फिक्स्ड इनकम में डालें अपना पैसा. बैलेंस्ड फंड बाज़ार के चढ़ने पर तेज़ी से बढ़ता है मगर गिरने पर तेज़ी से नहीं गिरता. जिस एमएफ का पांच साल से ज़्यादा समय तक ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा रहा है, उस फंड पर पैसा लगाएं.

(डिस्क्लेमर : निवेशकों को सलाह है कि उपरोक्त सलाह पर अमल करने से पूर्व स्वयं मूल्यांकन कर लें.)


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