यह ख़बर 16 जून, 2012 को प्रकाशित हुई थी

प्रणब ने कहा, हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी है सरकार!

खास बातें

  • नीतिगत लाचारी को लेकर सरकार की आलोचना कर रहे उद्योग जगत को सख्त संदेश देते हुए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सरकार हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी है।
मुंबई:

नीतिगत लाचारी को लेकर सरकार की आलोचना कर रहे उद्योग जगत को सख्त संदेश देते हुए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सरकार हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी है। उन्होंने संकेत दिया कि आर्थिक नरमी पर लगाम लगाने के लिए रिजर्व बैंक सोमवार को ब्याज दरों में कटौती कर सकता है।

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) द्वारा राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद शनिवार अपने पहले सार्वजनिक भाषण में मुखर्जी ने कहा कि सरकार स्टैंडर्ड एंड पुअर्स जैसी वैश्विक एजेंसियों और उद्योगों द्वारा जाहिर चिंता से निपटने के लिए कदम उठा रही है। उन्होंने यहां ऐसोचैम के सम्मेलन में कहा ‘वित्त मंत्री के तौर पर मैं जमीनी हकीकत से इनकार नहीं कर सकता... मैं उनकी  चिंता को खारिज नहीं करता। मैंने उनकी चिंता को गंभीरता से लिया है और यह देखने की कोशिश करूंगा कि क्या किया जा सकता है। आरबीआई द्वारा नरमी से निपटने में सरकार का सहयोग करने का संकेत देते हुए उन्होंने कहा, ‘सभी तत्वों को ध्यान में रखते हुए मुझे भरोसा है कि आरबीआई मौद्रिक नीति में समायोजन करेगा जैसे हम राजकोषीय नीति में समायोजन कर रहे हैं।’

वित्त वर्ष 2011-12 के दौरान आर्थिक वृद्धि दर के नौ साल के न्यूनतम स्तर 6.5 फीसद पर पहुंचने के बीच उम्मीद है कि आरबीआई सोमवार को मौद्रिक नीति की मध्य तिमाही समीक्षा में ब्याज दरें घटाएगा।

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मुखर्जी ने पेट्रोलियम सब्सिडी के बढ़ते बोझ को केंद्र के लिए एक मुश्किल मुद्दा बताया जिसके लिए उन्होंने सरकार से अपने कर में कटौती की अपील की है।