यह ख़बर 04 दिसंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

भारत के वृद्धि दर अनुमान को घटा सकती है मूडीज

खास बातें

  • मूडीज ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ऊंची ब्याज दरों की वजह से संघर्ष कर रही है, पर महंगाई को कम करने का मकसद पूरा नहीं हो पाया है।
New Delhi:

वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आने वाले दिन चुनौती भरे होंगे और वह वित्तवर्ष 2011-12 के लिए भारत के आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 6.5 फीसदी कर सकती है। मूडीज एनालिटिक्स की रिपोर्ट में कहा गया है, हमें अगले वित्तवर्ष के लिए वृद्धि दर के अनुमान को सात से घटाकर 6.5 फीसदी करना पड़ सकता है। चालू वित्तवर्ष की दूसरी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर घटकर 6.9 प्रतिशत रह गई है। यह पिछले दो साल का वृद्धि दर का सबसे निचला आंकड़ा है। चालू वित्तवर्ष की पहली छमाही में औसत वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रही है। 2010-11 में आर्थिक वृद्धि दर 8.5 प्रतिशत रही थी। मूडीज ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ऊंची ब्याज दरों की वजह से संघर्ष कर रही है, पर इसके बावजूद महंगाई को कम करने का मकसद पूरा नहीं हो पाया है। पिछले साल दिसंबर से महंगाई की दर 9 फीसदी से ऊपर बनी हुई है। भारतीय उद्योग जगत का कहना है कि ऊंची ब्याज दरों की वजह से नया निवेश प्रभावित हुआ है, जिससे औद्योगिक वृद्धि की रफ्तार घटी है। मूडीज ने कहा है, यह कहना कठिन है कि किसी समय अर्थव्यवस्था की स्थिति में सुधार आ सकता है, क्योंकि अभी यूरोपीय संकट का पूरा असर नहीं दिखा है। वित्तीय क्षेत्र के समूह सिटीग्रुप ने पिछले सप्ताह 2011-12 के लिए देश की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 7.6 प्रतिशत से घटाकर 7.1 फीसदी किया था।


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