खास बातें
- मोंटेक का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव की वजह से इस वृद्धि को हासिल कर पाना संभव नहीं होगा।
नई दिल्ली: अर्थव्यवस्था की रफ्तार घटने की आशंका के बीच योजना आयोग ने आज कहा कि चालू वित्त वर्ष में संभवत: 8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर हासिल नहीं हो पाएगी। आयोग का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव की वजह से इस वृद्धि को हासिल कर पाना संभव नहीं होगा। योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया ने बुधवार को इस सवाल पर कि क्या भारत 2011-12 में 8 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर हासिल कर पाएगा, पर कहा, मुझे नहीं लगता। हमें कभी नहीं लगा कि यह साल ऊंची वृद्धि दर का होगा। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर घटकर 7.7 प्रतिशत पर आ गई है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 8.8 प्रतिशत पर थी। यह पिछली छह तिमाहियों में वृद्धि दर का सबसे कम आंकड़ा है। योजना आयोग ने पहले अनुमान लगाया था कि 2011-12 में आर्थिक वृद्धि दर 8 से 8.3 प्रतिशत के बीच रहेगी। सरकार ने आर्थिक वृद्धि दर 8.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक का आकलन है कि सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 8 प्रतिशत रहेगी। 2010-11 में देश की अर्थव्यवस्था 8.5 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी। आहलूवालिया ने कहा, 8 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल करने से ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि किस तरह हम इस कम रफ्तार को बढ़ा पाते हैं।