खास बातें
- मोहनदास पई ने 1994 में इंफोसिस ज्वाइन किया था और मई 2000 से ही वह बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल थे। उनके इस्तीफे से इंडस्ट्री के लोग हैरान हैं।
बेंगलुरु: इंफोसिस टेक्नोलॉजीज के मानव संसाधन निदेशक और बोर्ड के सदस्य मोहनदास पई ने कंपनी से इस्तीफा देने की घोषणा की है। वह इस साल जून में कंपनी से नाता तोड़ेंगे। कंपनी ने शुक्रवार को यह घोषणा की। हालांकि, पई के इंफोसिस का मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) बनने के बारे में कयास लगाए जा रहे थे। पई ने अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि वह नए लोगों को कंपनी को आगे ले जाने का अवसर देने के लिए पद छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी के नए लोग इंफोसिस को वैश्विक स्तर पर शीर्ष तीन कंपनियों में शुमार कराएंगे। उन्होंने कहा कि हमने 1994 में 1 करोड़ डॉलर की इस कंपनी को आज छह अरब डॉलर की कंपनी बना दिया है। हम वैश्विक स्तर पर शीर्ष 10 कंपनियों में है। अगले पांच साल में हमें इस शीर्ष तीन में पहुंचाना है। पई ने कहा, मुझे लगता है कि हमें नए लोगों की जरूरत है। हम इसे कर सकते हैं, पर नेतृत्व में नए चेहरे आने चाहिए। पई ने कंपनी के साथ निदेशक मंडल से भी इस्तीफा दे दिया है। पई 1994 में इंफोसिस में आए थे। वह मई, 2000 से कंपनी के निदेशक मंडल में हैं। 1994 से 2006 के दौरान वह कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी रहे। पई 11 जून, 2011 को कंपनी की सालाना आम बैठक में सेवाओं से मुक्त होंगे। यह पूछे जाने पर कि क्या उनके इस्तीफे की कोई और वजह भी है, उन्होंने कहा, मेरी कोई ऐसी महत्वाकांक्षा नहीं है, जो पूरी नहीं हुई हो, कंपनी का सीईओ बनना मेरा लक्ष्य नहीं था। उन्होंने कहा, मेरा मकसद सिर्फ कंपनी प्रबंधन में भागीदारी तथा उसे आगे ले जाने का था। इंफोसिस के मुख्य संरक्षक एनआर नारायणमूर्ति ने पई के योगदान की सराहना करते हुए कहा, इंफोसिस को आगे ले जाने में मोहन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हम जानते हैं कि वह यह कष्टदायक फैसला इसलिए ले रहे हैं, क्योंकि उनके पास एक बड़ी परियोजना राष्ट्र निर्माण की है। इंफोसिस से इस्तीफे देने वाले पई दूसरे वरिष्ठ स्तर के कार्यकारी हैं। इससे पहले नंदन नीलेकणि ने इंफोसिस छोड़ी थी। नीलेकणि इस समय विशिष्ट पहचार प्राधिकरण (यूआईडी) के चेयरमैन हैं। पई ने कहा, मैंने 2006 में स्वेच्छा से सीएफओ का पद छोड़ा था। अब मैं मानव संसाधन का काम देखता हूं। मुझे लगता है कि अब समय आ गया है, जब अन्य लोगों को आगे आने का मौका दिया जाना चाहिए। कंपनी के चेयरमैन नारायणमूर्ति इस साल अगस्त में सेवानिवृत्त हो रहे हैं। कंपनी के निदेशक मंडल की अगली बैठक 30 अप्रैल को होगी, नेतृत्व के स्तर पर उत्तराधिकारी को लेकर विचार होगा। इससे पहले खबरें आई थीं कि कंपनी के मुख्य परिचालन अधिकारी एसडी शिबूलाल कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बन सकते हैं, जबकि वर्तमान मुख्य कार्यकारी अधिकारी कृष गोपालकृष्णन को नारायण मूर्ति के सेवानिवृत्त होने के बाद कंपनी का चेयरमैन बनाया जा सकता है। इसी तरह पई को सीओओ बनाए जाने की भी खबरें थीं। कंपनी ने उत्तराधिकारी की तलाश के लिए एक समिति बनाई थी, जिसमें प्रो. जेफ्री एस लेहमन, एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्यारेंस के पूर्व प्रबंध निदेशक एवं सीईओ दीपक एम सतवालेकर और आईसीआईसीआई बैंक के गैर कार्यकारी चेयरमैन केवी कामत शामिल थे। इस समिति को कंपनी के चेयरमैन, सीईओ, सीओओ और सीएफओ के उत्तराधिकारी की तलाश का काम करना है।