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डीजीसीए ने किंगफिशर एयरलाइंस का लाइसेंस निलंबित किया

भारत की प्रीमियम एयरलाइंस में से एक किंगफिशर एयरलाइंस के लाइसेंस को अगले आदेश तक सस्पेंड कर दिया गया है। डीजीसीए की तरफ से भेजे गए कारण बताओ नोटिस में एयरलाइंस की तरफ से कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया था।
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NDTV Profit हिंदी01:50 AM IST, 21 Oct 2012NDTV Profit हिंदी
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उड्डयन नियामक ने शनिवार को संकटग्रस्त विमानन कम्पनी किंगफिशर एयरलाइसेंस का संचालन लाइसेंस निलंबित कर दिया और संचालन फिर से शुरू करने की तर्कसंगत योजना पेश करने में कम्पनी की अक्षमता को इसका कारण बताया।

विमानन कम्पनी ने शुक्रवार को 1 अक्टूबर को घोषित तालाबंदी की अवधि को बढ़ाकर 23 अक्टूबर कर दिया था।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने विमानन कम्पनी द्वारा भेजे गए जवाब पर संज्ञान लेते हुए अगली सूचना तक संचालन लाइसेंस को निलंबित करने का फैसला लिया।"

अधिकारी ने कहा, "यह फैसला शनिवार को मौजूदा स्थिति को देखते हुए लिया गया, जिसमें विमानन कम्पनी के पास उड़ानों का संचालन फिर से शुरू करने या अपने कर्मचारियों को वेतन का भुगतान कर पाने की कोई तर्कसंगत योजना नहीं है।"

कम्पनी ने एक दिन पहले संचालन फिर से शुरू करने की योजना पर नियामक द्वारा कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिए और समय की मांग की थी।

अधिकारी ने कहा, "हम उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हैं। वे औद्योगिक अस्थिरता की समस्या का समाधान पेश कर पाने में असफल रहे और हम अंतहीन समय तक उनका इंतजार नहीं कर सकते।"

नियामक ने एक नोटिस जारी की थी, जिसमें विमानन कम्पनी से संचालन फिर से शुरू करने की योजना और कर्मचारियों के वेतन का भुगतान करने की योजना पर जवाब मांगा गया था।

नियामक ने कहा था कि विमानन कम्पनी का लाइसेंस रद्द हो सकता है, क्योंकि वह सुरक्षित, सक्षम और भरोसेमंद सेवा बहाल कर पाने में नाकाम रही।

नियामक ने विमानन कम्पनी की शीतकालीन उड़ान योजना भी रद्द कर दी है।

कम्पनी पिछले साल हर सप्ताह 2,930 उड़ानों का संचालन करती थी, लेकिन कर्ज बढ़ने और कर्मचारियों के काम छोड़ने के कारण इसकी संख्या लगातार घटती गई।

सितम्बर माह में विमानन कम्पनी की बाजार हिस्सेदारी न्यूनतम 3.5 फीसदी रह गई थी। कम्पनी पर अभी कुल 7,000 करोड़ रुपये का कर्ज है।

एक साल पहले कम्पनी के बेड़े में 66 विमान थे, जो घटकर सिर्फ 10 रह गए हैं। कम्पनी यात्रियों की संख्या में देश की दूसरी सबसे बड़ी विमानन कम्पनी भी थी।

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