यह ख़बर 15 फ़रवरी, 2011 को प्रकाशित हुई थी

केयर्न-वेदांता सौदे को आगे भेजेगा पेट्रोलियम मंत्रालय

खास बातें

  • रेड्डी ने मंगलवार को कहा कि केयर्न-वेदांता के सौदे को मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति के पास भेजा जा रहा है।
पानीपत:

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम :ओएनजीसी: के रुख का मजबूती से समर्थन करते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय वेदांता रिसोर्सेज द्वारा केयर्न इंडिया के 9.6 अरब डॉलर के अधिग्रहण के सौदे को मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल के पास भेजने का फैसला किया है। पेट्रोलियम मंत्री एस जयपाल रेड्डी ने मंगलवार को कहा कि केयर्न-वेदांता के सौदे को मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति :सीसीईए: के पास भेजा जा रहा है, क्योंकि राजस्थान में केयर्न इंडिया के क्षेत्र में ओएनजीसी द्वारा की जा रही अतिरिक्त रायल्टी के मसले को सुलझाया नहीं जा सका है। रेड्डी ने कहा, यह बड़ा मसला है, इसलिए हम इसे सीसीईए के पास भेजने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीसीईए के लिए नोट तैयार किया जा रहा है और इसे मंत्रिमंडल के पास भेजने से पहले वित्त, विधि और कंपनी मामलों के मंत्रालय की राय ली जाएगी। रेड्डी ने कहा, हम किसी क्रेता या विक्रेता को बेलआउट नहीं दे सकते। हम तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम की चिंताओं से समझौता नहीं कर सकते। रेड्डी ने कहा कि उनका मंत्रालय ओएनजीसी के इस दावे का समर्थन करता है कि केयर्न इंडिया के प्रमुख राजस्थान ब्लॉक में रायल्टी को लागत में शामिल कर मुनाफे की गणना की जानी चाहिए। ओएनजीसी राजस्थान में न केवल अपने हिस्से के 30 प्रतिशत तेल पर रायल्टी देती है, बल्कि उसे केयर्न इंडिया के 70 फीसद हिस्से के लिए भी रायल्टी का भुगतान करना पड़ता है। इस वजह से ओएनजीसी के लिए यह क्षेत्र आर्थिक दृष्टि से व्यवहारिक नहीं रह गया है। मंत्री ने कहा, हम इस प्रक्रिया को तेज करने का प्रयास कर रहे हैं। हमें लगता है कि दो-तीन हफ्ते में यह मामला सीसीईए को भेजा जाएगा।


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