खास बातें
- इस्पात निर्माता कंपनियों ने केजी डी6 क्षेत्र से प्राकृतिक गैस आपूर्ति में कटौती के पेट्रोलियम मंत्रालय के इकतरफा निर्णय की आलोचना की है।
New Delhi: इस्पात निर्माता कंपनियों ने केजी डी6 क्षेत्र से प्राकृतिक गैस आपूर्ति में कटौती के पेट्रोलियम मंत्रालय के इकतरफा निर्णय की आलोचना करते हुए बुधवार को कहा कि इस तरह का निर्णय लेने का अधिकार केवल मंत्री समूह को ही है। सूत्रों का कहना है कि हालांकि, इसकी संभावना कम ही है कि मंत्रालय उनके इस विरोध पर गौर करेगा। मंत्रालय ने बंबई उच्च न्यायालय के निर्देश पर यह बैठक बुलाई थी। स्पंज आयरन निर्माता कंपनी एस्सार स्टील, वेलस्पन मेक्सस्टील तथा इस्पात अधिकारियों ने कहा कि वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता वाला मंत्री समूह ही गैस आपूर्ति में कटौती का फैसला करने में सक्षम है क्योंकि गैस आवंटन भी इसी समूह ने किया था। पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव (विपणन) अपूर्व चंद्रा ने कहा, 'हमने उन सब को सुना तथा बंबई उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार 18 मई तक आदेश पारित कर दिया जाएगा।' केजी डी6 क्षेत्र रिलायंस इंडस्ट्रीज का है और मंत्रालय ने यहां से 'गैर प्रमुख' क्षेत्रों को की जाने वाली गैस आपूर्ति में कटौती की है। इसका उद्देश्य उर्वरक तथा बिजली जैसे प्रमुख क्षेत्रों को गैस आपूर्ति बढ़ाना है। चंद्रा ने बताया कि एस्सार का कहना है कि केजी डी6 गैस आपूर्ति के स्थान पर दूसरा तरल ईंधन अथवा आयातित एलएनजी उपयोग में लाने से उसे सालाना 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। इसी प्रकार वेलस्पन और इस्पात ने कहा कि उन्हें इस कटौती से 150 से 200 करोड़ रुपये तक का नुकसान होगा। दूसरी तरफ बिजली और उर्वरक कंपनियों को भी इस बैठक में बुलाया गया था, उनकी मांग थी कि उन्हें केजी डी6 से पूरी गैस की आपूर्ति होनी चाहिए।