खास बातें
- आईपीओ के आवेदन को छोटा तथा सरल बनाने पर सेबी विचार कर रहा है ताकि अधिक से अधिक निवेशकों को शेयर बाजार की ओर आकर्षित किया जा सके।
New Delhi: बाजार नियामक सेबी आरंभिक सार्वजनिक पेशकश :आईपीओ: के आवेदन को छोटा तथा सरल बनाने पर विचार कर रहा है ताकि अधिक से अधिक निवेशकों को शेयर बाजार की ओर आकर्षित किया जा सके। इसी तरह सेबी एएसबीए तथा नॉन-एएसबीए निवेशकों के लिए समान आईपीओ आवेदन पत्र पर भी विचार कर रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सेबी द्वारा इस दिशा में सक्रियता से कदम उठाने पर चर्चा हो रही है और इसी माह बोर्ड बैठक में भी यह मुद्दा उठा था। सेबी का मानना है कि आईपीओ में शेयरों के लिए आवेदन करने का मौजूदा फार्म अनावश्यक रूप से लंबा है क्योंकि इस फार्म में निवेशकों से कुछ ऐसी जानकारी मांगी जाती है जिसके बिना भी काम चल सकता है। अधिकांश मामलों में इस तरह का आवेदन 15-20 पन्नों का होता है जबकि निवेशकों को आमतौर पर केवल 2-3 पन्ने ही भरने होते हैं। शेष पन्नों में कंपनी के बारे में सूचना, निर्देश, बैंक तथा पंजीयकों की जानकारी सहित अन्य सूचनाएं होती हैं। सेबी की प्राथमिक बाजार परामर्श समिति उस प्रस्ताव पर विचार कर रही है जिसके तहत इस फार्म से वह ब्यौरा हटाया जाना है जो आवेदक के डीमैट तथा बैंक खाते में उपलब्ध रहता है। इसमें आवेदक निवेशक के पिता या पति का नाम, पता, फैक्स नंबर तथा अन्य संपर्क ब्यौरा भी है। वरिष्ठ सूत्रों ने कहा कि इस पहल के तहत निवेशक द्वारा दी जाने वाली जानकारी आधी ही रह जाएगी। सेबी का मानना है कि छोटे तथा सरल आईपीओ आवेदन फार्म से सार्वजनिक पेशकशों में और अधिक छोटे निवेशकों को आकषिर्त किया जा सकेगा। उल्लेखनीय है कि हाल ही के बरसों तक खुदरा निवेशक प्राथमिक बाजार को ही वरीयता देते रहे हैं और आमतौर पर पहली बार शेयर बाजार में प्रवेश यहीं से होता है। लेकिन हाल फिलहाल खुदरा निवेशकों का उत्साह घटा है। सूत्रों का कहना है कि सरकार भी बाजार नियामक से कह रही है कि प्राथमिक बाजार में आम निवेशकों की रुचि को नये सिरे से बाहल किया जाए। इसके अलावा इस प्रस्ताव पर भी विचार हो रहा है कि सभी सार्वजनिक पेशकशों में निवेशकों को आनलाइन बोली लगाने का विकल्प मिले।