यह ख़बर 19 जून, 2012 को प्रकाशित हुई थी

इस साल ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश कम : विशेषज्ञ

खास बातें

  • विशेषज्ञों का मानना है कि रिजर्व बैंक के समक्ष ब्याज दरें कम करने की गुंजाइश काफी सीमित है और चालू वित्त वर्ष में इसमें सिर्फ आधा फीसद कटौती की ही संभावना दिखाई देती है।
नई दिल्ली:

विशेषज्ञों का मानना है कि रिजर्व बैंक के समक्ष ब्याज दरें कम करने की गुंजाइश काफी सीमित है और चालू वित्त वर्ष में इसमें सिर्फ आधा फीसद कटौती की ही संभावना दिखाई देती है।

रिजर्व बैंक ने मध्य तिमाही समीक्षा में ब्याज दरों को ज्यों का त्यों रखा और कहा कि आर्थिक नरमी के लिए दूसरे कई तत्व जिम्मेदार हैं। इसमें ब्याज दर की भूमिका अपेक्षाकृत कम है।

एचएसबीसी के मुख्य अर्थशास्त्री (भारत और आसियान) लीफ लायबेकर एस्केसेन ने कहा, ‘आने वाले दिनो में ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश सीमित है और मौद्रिक नीति में वृद्धि को प्रोत्साहित करने के लिए अधिक सुदृढ़ संस्थागत सुधारों पर ध्यान देने की जरूरत है।’

एचएसबीसी ने कहा, ‘हम अपने रुख पर कायम हैं कि मौद्रिक नीति को उदार बनाने की संभावनाएं सीमित है और फिलहाल चालू वित्त वर्ष के दौरान सिर्फ आधा फीसद तक की कटौती की संभावना दिखती है।’ स्टैंडर्ड चार्टर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक बाह्य अथवा घरेलू गतिविधियों से जब तक मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय गिरावट नहीं आती रिजर्व बैंक द्वारा आने वाले दिनों में रेपो दरों में कटौती की संभावना नहीं दिखाई देती।

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रिपोर्ट में कहा गया, ‘हमारा अनुमान है कि मुद्रास्फीति सालाना स्तर पर औसतन 7.2 फीसद पर रहेगी जिसमें बढ़ोतरी का जोखिम रहेगा इसलिए रिजर्व बैंक के लिए निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती मुश्किल होगी।’