खास बातें
- मुखर्जी ने कहा कि महंगाई के लिए खराब वितरण प्रणाली, वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत में वृद्धि सहित कई मुद्दे जिम्मेदार हैं।
नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने गुरुवार को कहा कि महंगाई के लिए खराब वितरण प्रणाली, वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत में वृद्धि सहित कई मुद्दे जिम्मेदार हैं। राज्यसभा में महंगाई के मुद्दे पर चर्चा का जवाब देते हुए मुखर्जी ने महंगाई धीरे-धीरे कम होने के अपने दावे को पुष्ट करने के लिए आंकड़ों का हवाला दिया और आर्थिक सुधारों खासकर बहु-ब्रांड खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की दिशा में विपक्ष के सहयोग की मांग की। मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने हालांकि कहा कि वह केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा जताई गई 'लाचारी' को खारिज करती है। भाजपा इसके बाद सदन से बहिर्गमन कर गई। मुखर्जी ने अपने जवाब में उल्लेख किया कि खाद्य महंगाई दर जो 29 अक्टूबर को समाप्त हुए सप्ताह में 11.8 प्रतिशत थी, वह 26 नवंबर को समाप्त हुए सप्ताह में घटकर 6.6 प्रतिशत पर आ गई। उन्होंने कहा, "खाद्य महंगाई दर में प्रत्येक सप्ताह कमी आ रही है।" मुखर्जी ने कहा कि वर्ष भर खाद्य महंगाई में उतार-चढ़ाव रहा है। यह 15 प्रतिशत तक गई है लेकिन गैर-खाद्य प्रमुख सामग्रियों, प्रमुख सामग्रियों और खाद्य सामग्रियों की कीमतों में कमी आ रही है। मुखर्जी ने कहा कि पेट्रोल पदार्थों की कीमतें पूरी तरह से नियंत्रण मुक्त नहीं की गई हैं। उन्होंने पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्थिति को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने हालांकि कहा कि 'जब मैं यह कहता हूं कि कीमतें कम होंगी तो इसका अर्थ यह नहीं है कि कीमतें रातोंरात कम हो जाएंगी।' वहीं, मुखर्जी के जवाब पर विपक्ष ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री 'लाचारी' जता रहे हैं। भाजपा नेता एम. वेंकैया नायडू ने कहा, "हमने एक अत्यंत रचनात्मक चर्चा करने की अपनी पूरी कोशिश की..मेरा केवल यह कहना है कि छह सालों के दौरान वे सत्ता में रहे, लेकिन किसी ने भी उन्हें ढांचागत बदलाव करने से नहीं रोका और आज सातवें वर्ष केंद्रीय वित्त मंत्री लाचारी जता रहे हैं। हम इसमें उनकी मदद नहीं कर सकते, इसलिए हम बहिर्गमन कर रहे हैं।"