खास बातें
- ताजा विकास दर उम्मीद से काफी कम है। साथ ही यह पिछले महीने की 8.8 फीसदी विकास दर से भी काफी कम है।
नई दिल्ली: पूंजीगत वस्तुओं और विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन में भारी कमी के चलते जुलाई में देश की औद्योगिक उत्पादन की दर में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 3.3 फीसदी की सुस्त वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले 21 महीने का न्यूनतम स्तर है। ताजा विकास दर उम्मीद से काफी कम है। साथ ही यह पिछले महीने की 8.8 फीसदी विकास दर से भी काफी कम है। शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की होने वाली मौद्रिक समीक्षा को देखते हुए अब सभी की नजर आरबीआई के फैसले पर है। देखना यह है कि क्या आरबीआई अपने फैसले में इस सुस्त विकास दर का ध्यान रखेगा। केंद्रीय सांख्यिकी और योजना क्रियान्वयन मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन में 15.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। पिछले वर्ष जुलाई में औद्योगिक उत्पादन की दर 9.9 फीसदी थी। सूचकांक में प्रमुख भागीदारी वाले विनिर्माण क्षेत्र में समीक्षाधीन अवधि में विकास की दर 2.3 फीसदी जबकि खनन क्षेत्र में विकास दर 2.8 फीसदी रही। बिजली उत्पादन में हालांकि 13.1 फीसदी की अच्छी वृद्धि दर्ज की गई। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के महासचिव राजीव कुमार ने कहा, "जुलाई महीने में विनिर्माण क्षेत्र का 2.3 फीसदी विकास 21 महीने में सबसे कम है। आने वाले महीनों में बेहतर की उम्मीद नहीं है। पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में नकारात्मक विकास दर्ज किया गया है जो पिछले 24 महीने में सबसे निचला स्तर है।" कुमार ने कहा कि विनिर्माण और खनन क्षेत्र में विकास की दर काफी कम रही है और यदि नीतिगत सुधार के कदम नहीं उठाए गए, तो हमें जल्दी ही नकारात्मक विकास भी देखने को मिल सकता है। औद्योगिक उत्पादन की दर में आई गिरावट से औद्योगिक समूहों के उस तर्क को मजबूती मिलती है जिसमें उन्होंने बढ़ते ब्याज दरों के कारण विकास पर असर पड़ने की बात कही है। भारतीय रिजर्व बैंक जनवरी 2010 के बाद से अब तक प्रमुख दरों में 11 बार वृद्धि कर चुका है। इन तमाम प्रयासों के बावजूद मासिक महंगाई दर दहाईं अंक के करीब है जबकि पिछले सप्ताह खाद्यान्न महंगाई की दर 9.55 फीसदी दर्ज की गई। रेलीगेयर कैपिटल मार्केट के मुख्य अर्थशास्त्री-निदेशक जय शंकर ने कहा, "जहां तक नीतिगत कदम उठाने की बात है, आरबीआई के लिए मुख्य दरों में वृद्धि नहीं करने का फैसला एक सही कदम होगा, फिर भी हमारा विश्वास है कि आरबीआई इस चक्र में आखिरी बार मुख्य दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि कर सकती है।"