GDP Report: आज दूसरी तिमाही के GDP वृद्धि दर के आंकड़े होंगे जारी, जानें कैसा रह सकता है भारतीय अर्थव्यवस्था का हाल

India Q2 GDP Report: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के बुलेटिन में दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट (GDP Growth Rate) 6.1 से 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है.

GDP Report: आज दूसरी तिमाही के GDP वृद्धि दर के आंकड़े होंगे जारी, जानें कैसा रह सकता है भारतीय अर्थव्यवस्था का हाल

GDP Report: पिछले वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर (GDP Growth) 8.4 प्रतिशत रही थी.

नई दिल्ली:

India Q2 GDP Report: चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर के आंकड़े आज शाम जारी किए जाएंगे.राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की ओर से जारी किए जाने वाले आंकड़ों (GDP Data) से कृषि और विनिर्माण क्षेत्रों के प्रदर्शन के बारे में भी जानकारी मिलेगी. रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) का अनुमान है कि दूसरी तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहेगी. वहीं, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपनी रिपोर्ट में वृद्धि दर 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है.

पिछले वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर (GDP Growth) 8.4 प्रतिशत रही थी. इससे पहले इसी महीने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के बुलेटिन में दूसरी तिमाही में वृद्धि दर 6.1 से 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है.

आपको बता दें कि दूसरी तिमाही की जीडीपी ग्रोथ रेट (GDP Growth Rate) को लेकर अलग-अलग एजेंसियों ने पूर्वानुमान जारी किए हैं, लेकिन इन एजेंसियों द्वारा जताए जा रहे जीडीपी विकास अनुमान इस वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में दर्ज किए गए 13.5 प्रतिशत के आधे या आधे से भी कम हैं.

 ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, Goldman Sachs Group Inc और  Barclays Plc सहित कई अर्थशास्त्रियों के अनुसार, भारत की वार्षिक आर्थिक वृद्धि कुछ वर्षों के लिए लगभग 6% तक धीमी होने का अनुमान है. हालांकि, उनका मानना है कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिहाज से बुरा नहीं है. जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth) 2022 की शुरुआत के बाद से आरबीआई के 2-6% लक्ष्य लक्ष्य से ऊपर रहा है. केंद्रीय बैंक 2024 तक इसे 4% तक करने की कोशिश में है. 

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वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंदी  का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है. इस समय वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी और महंगाई के अलावा रूस-यूक्रेन युद्ध, चीन में फिर से कोरोना के नए मामले और प्रतिबंधों के बढ़ने, फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में सख्ती और सप्लाई चेन जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है.



(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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