यह ख़बर 11 जून, 2013 को प्रकाशित हुई थी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में और गिरावट, 58.98 तक पहुंचा

खास बातें

  • रुपये में आई इस गिरावट ने पहले से ही ऊंचे व्यापार और चालू खाते के घाटे से जूझ रही अर्थव्यवस्था के समक्ष महंगाई का जोखिम बढ़ गया है। रुपये की गिरावट से आयात महंगा होगा जिसका असर खाद्य तेल, कच्चा तेल तथा दूसरी वस्तुओं के दाम पर पड़ सकता है।
नई दिल्ली:

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया आज और गिरकर 58.33 रुपये प्रति डॉलर के अब तक के सबसे निचले स्तर पर खुला और फिर गिरकर दिन के निम्नतम स्तर 58.98 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंचा। इसके बाद कुछ सुधार के साथ 58.45 पर कारोबार कर रहा था।

फॉरेक्स बाजार के विश्लेषकों ने बताया कि इसके अलावा बैंकों और आयातकों की ओर से डॉलर मांग बढ़ने और अन्य मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती से भी रुपये की धारणा प्रभावित हुई।

रुपये में आई इस गिरावट ने पहले से ही ऊंचे व्यापार और चालू खाते के घाटे से जूझ रही अर्थव्यवस्था के समक्ष महंगाई का जोखिम बढ़ गया है। रुपये की गिरावट से आयात महंगा होगा जिसका असर खाद्य तेल, कच्चा तेल तथा दूसरी वस्तुओं के दाम पर पड़ सकता है।

डॉलर की यह तेजी अमेरिका में नए आर्थिक आंकड़ों के जारी होने के बाद देखी जा रही है। इसका असर केवल भारतीय नोट पर नहीं बल्कि अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं में भी देखा जा रहा है। कहा जा रहा है कि एक से दो दिनों में रुपये की तुलना में डॉलर अभी और मजबूत होगा।

रुपये की इस गिरावट का असर पेट्रोल-डीजल की कीमत पर पड़ेगा। दोनों ईंधन की कीमत बढ़ने के आसार बन रहे हैं। साथ ही बाजार में सोने चांदी की कीमत में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है।

लगातार पांच हफ्तों से रुपये की स्थिति में गिरावट दर्ज की जा रही है। इससे पूरे एशियाई बाजार में किसी भी करेंसी में यह सबसे बुरी स्थिति में है।

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डॉलर के मुकाबले रुपये में इस भारी गिरावट के पीछे का कारण यह बताया जा रहा है कि बाजार में लगातार आरबीआई से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन ऐसा नहीं होने की वजह से ऐसे हालात बन गए हैं। दूसरी वजह यह भी बताई जा रही है कि आरबीआई ने अभी तक रुपये की गिरती स्थिति को सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है जिसकी वजह से यह गिरावट लगातार जारी है। तीसरी सबसे अहम वजह यह बताई जा रही है कि दबाव में निर्यातकों में डॉलर खरीदने की होड़ ज्यादा बढ़ गई है।