यह ख़बर 29 जनवरी, 2012 को प्रकाशित हुई थी

विदेशों में नौकरियां दें भारतीय कंपनियां : एचसीएल

खास बातें

  • एचसीएल टेक्नोलॉजीज ने कहा है कि रविवार को भारतीय आईटी उद्योग वृद्धि के लिए नए मॉडल की तलाश में हैं। ऐसे में उसने सुझाव दिया है कि अब ज्यादा से ज्यादा भारतीय कंपनियों को विदेशों में स्थानीय नौकरियां देने पर विचार करना चाहिए।
दावोस:

एचसीएल टेक्नोलॉजीज ने कहा है कि आज भारतीय आईटी उद्योग वृद्धि के लिए नए मॉडल की तलाश में हैं। ऐसे में उसने सुझाव दिया है कि अब ज्यादा से ज्यादा भारतीय कंपनियों को विदेशों में स्थानीय नौकरियां देने पर विचार करना चाहिए।

विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के सालाना सम्मेलन में भाग लेते हुए देश की चौथी सबसे बड़ी आईटी कंपनी एचसीएल टेक्नोलॉजीज ने अगले पांच साल में अमेरिका और यूरोप में 10,000 रोजगार के अवसरों का सृजन करने की घोषणा की है।

एचसीएल टेक्नोलॉजीज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनीत नायर ने डब्ल्यूईएफ बैठक में अलग से कहा, ‘आज दुनिया अलग तरह की समस्याएं झेल रही है। ऐसे में जब हम इस तरह के मंच पर आते हैं तो एचसीएल जैसी भारतीय कंपनियों के लिए यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि वे समस्या का हल लेकर आएं, न कि समस्या की वजह हों।’ जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल की टिप्पणी कि कंपनियां यूरोप में निवेश के लिए आमंत्रित हैं, पर उन्हें नौकरियां देनी होंगी, का जिक्र करते हुए नायर ने कहा कि एचसीएल की पहल से यह धारणा दूर हो सकेगी कि भारतीय कंपनियों पश्चिम के लोगों की नौकरियां ले रही हैं।

नायर ने कहा, ‘हमने पहला कदम उठाया है। मुझे उम्मीद है कि और कंपनियां भी इसे अपनाएंगी। इससे भारतीय कंपनियां ज्यादा आकषर्क नजर आएंगी। ऐसी कंपनियां जो सामाजिक रूप से जिम्मेदार एक उपक्रम के रूप में स्थानीय समस्याओं को हल करेंगी।’ उन्होंने कहा कि यह एक बड़ा बदलाव होगा।
‘कई वैश्विक कंपनियां ऐसी हैं जो अमेरिका से बाहर नौकरियां ले जा रही हैं, पर हमारी भारतीय कंपनियां उन बाजारों में नौकरी देगी।’ भारतीय आईटी बाजार के बारे में नायर ने कहा कि कर्मचारी और अन्य लागत बढ़ रही है। कर छूट का दौर समाप्त हो रहा है और फिलिपींस जैसे देश ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो रहे हैं। ‘ऐसे में भारतीय आईटी उद्योग भी विकास के लिए नए मॉडल को देख रहा है।’ यह पूछे जाने पर कि क्या कम लागत के कारोबारी माडल को पश्चिम में नौकरियों के सृजन के साथ कायम रखा जा सकता है, नायर ने कहा कि शिक्षा संस्थानों, स्थानीय सरकारों, समुदायों और उपभोक्ताओं के साथ भागीदारी के जरिये लागत को उचित स्तर पर रखने में मदद मिलेगी।

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उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका में प्रति व्यक्ति लागत नहीं बढ़ रही है, बल्कि भारत में ऐसा हो रहा है।’’