भारत की यूरोपीय संघ से छोटे उद्यमों के लिये कार्बन कर से छूट देने की मांग: सूत्र

यूरोपीय संघ की ‘कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम' की स्वीकृति से भारतीय कंपनियों को इन उत्पादों के निर्यात पर कार्बन कर के रूप में अतिरिक्त बोझ से पार पाने में मदद मिलेगी.

भारत की यूरोपीय संघ से छोटे उद्यमों के लिये कार्बन कर से छूट देने की मांग: सूत्र

यह योजना फिलहाल बिजली मंत्रालय तैयार कर रहा है.

नई दिल्ली:

भारत ने यूरोपीय संघ से कुछ क्षेत्रों में सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिये कार्बन कर से छूट देने की मांग की है. यूरोपीय संघ (ईयू) का कार्बन कर इस साल अक्टूबर से अमल में आएगा. एक सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी. इसके साथ ही भारत अपने कार्बन प्रमाणपत्रों के लिये यूरोपीय संघ से द्विपक्षीय रूप से मान्यता देने को लेकर समझौते पर जोर दे रहा है.

यूरोपीय संघ कार्बन सीमा समायोजन प्रणाली (सीबीएएम) एक अक्टूबर से अमल में ला रहा है. इस व्यवस्था के तहत एक जनवरी, 2026 से ईयू में चुनिंदा वस्तुओं के आयात पर 20 से 35 प्रतिशत कर लगेगा.

इस साल अक्टूबर से इस्पात, सीमेंट, उर्वरक, एल्युमीनियम और हाइड्रोकार्बन उत्पादों सहित सात कार्बन-गहन क्षेत्रों की घरेलू कंपनियों को सीबीएएम मानदंडों का पालन करने के लिये यूरोपीय संघ के प्राधिकारणों से अनुपालन प्रमाणपत्र प्राप्त करना होगा.

भारत ने समझौते को द्विपक्षीय रूप से मान्यता देने की व्यवस्था के तहत यूरोपीय संघ से ‘कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम' (सीसीटीएस) को मान्यता देने को कहा है. यह योजना फिलहाल बिजली मंत्रालय तैयार कर रहा है.

यूरोपीय संघ की ‘कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम' की स्वीकृति से भारतीय कंपनियों को इन उत्पादों के निर्यात पर कार्बन कर के रूप में अतिरिक्त बोझ से पार पाने में मदद मिलेगी.

अधिकारी ने कहा, ‘‘भारत द्विपक्षीय और बहुपक्षीय दोनों स्तरों पर इस मुद्दे से निपट रहा है. द्विपक्षीय स्तर पर हमने यूरोपीय संघ से आपसी तौर पर स्वीकृत समझौते को मान्यता देने को कहा है. साथ ही अगर संभव हो तो एमएसएमई को इस कर से अलग रखने को कहा है जैसा कि कुछ अन्य देशों के मामले में हुआ है.''

उन्होंने कहा कि वित्त, वाणिज्य, बिजली, खान और इस्पात समेत विभिन्न मंत्रालयों के शीर्ष अधिकारियों तथा उद्योग प्रमुखों के साथ बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा हुई. बैठक की अध्यक्षता वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने की.

बैठक में उद्योग से कार्बन कर के लिये तैयार रहने और इससे निपटने के लिये कदम उठाने को कहा गया है. शोध संस्थान जीटीआरआई (ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव) की रिपोर्ट के अनुसार नई व्यवस्था के तहत एक अक्टूबर से भारत के लोहा, इस्पात और एल्युमीनियम के यूरोपीय संघ को निर्यात को अतिरिक्त जांच से गुजरना होगा.

वहीं एक जनवरी, 2026 से ईयू इस्पात, एल्युमीनियम, सीमेंट, उर्वरक, हाइड्रोजन और बिजली की हर खेप पर कार्बन कर वसूलना शुरू करेगा. भारत ने बीते वर्ष 2022 में यूरोपीय संघ को लोहा, इस्पात और एल्युमीनियम उत्पादों का 27 प्रतिशत निर्यात किया। मूल्य के हिसाब से यह 8.2 अरब डॉलर का था.

बहुपक्षीय स्तर पर भारत और कुछ अन्य देशों ने विश्व व्यापार संगठन में सीबीएएम को लेकर चिंता जतायी है. भारत ने फरवरी में इस संदर्भ में दस्तावेज सौंपे. अधिकारी ने कहा, ‘‘आज की बैठक में सरकार ने उद्योग को बताया कि इस मामले में घरेलू स्तर पर क्या हो रहा है...''

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