भारत और यूरोपीय संघ के बीच FTA जल्द चालू होने की उम्मीद

पिछले साल जनवरी में भारत और यूरोपीय संघ ने मुक्त व्यापार समझौते, निवेश संरक्षण और भौगोलिक संकेतक (जीआई) के लिए बातचीत फिर से शुरू की है. इटली ईयू का सदस्य है.न

भारत और यूरोपीय संघ के बीच FTA जल्द चालू होने की उम्मीद

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली:

भारत और इटली ने नई दिल्ली और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर वार्ता की प्रगति पर चर्चा की है और इसके जल्द पूरा होने की उम्मीद जताई गई है. वाणिज्य मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी. पिछले साल जनवरी में भारत और यूरोपीय संघ ने मुक्त व्यापार समझौते, निवेश संरक्षण और भौगोलिक संकेतक (जीआई) के लिए बातचीत फिर से शुरू की है. इटली ईयू का सदस्य है.

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और इटली के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मामलों के मंत्री एंटोनियो ताजानी के बीच 12 अप्रैल को हुई बैठक में यह मुद्दा उठा. एक बयान में कहा गया है, 'दोनों मंत्रियों ने एक मुक्त, संतुलित और निष्पक्ष मुक्त व्यापार समझौते को रेखांकित करते हुए इसके जल्द पूरा होने की उम्मीद जताई.'

दोनों नेताओं के बीच सितंबर के अंतिम सप्ताह में रोम में आर्थिक सहयोग पर संयुक्त आयोग (जेसीईसी) के अगले सत्र के आयोजन पर भी सहमति बनी. ताजानी ने सहयोग बढ़ाने के लिए अंतरिक्ष, प्रौद्योगिकी, रक्षा और कृषि जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में एक संयुक्त कार्यसमूह के गठन का सुझाव दिया. ताजानी ने दोनों देशों की संसद के बीच संसदीय मैत्री समूह कूटनीति को मजबूत करने और साइबर वार्ता की संभावनाएं तलाशने का सुझाव दिया.

गोयल ने जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया. गोयल यहां के आधिकारिक दौरे पर हैं. उनके साथ एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी आया है जिसमें भारतीय उद्योग और विभिन्न क्षेत्रों के निर्यातक शामिल हैं.

इस बीच, यहां भारत और इटली के कारोबारियों को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि इटली की कंपनियों के लिए भारत में निवेश के बड़े अवसर हैं.

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भारत के निर्यात पर उन्होंने कहा कि भारत ने 2021-22 में 676 अरब डॉलर की वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात किया. बीते वित्त वर्ष 2022-23 में हमारा निर्यात का आंकड़ा 765 अरब डॉलर पर पहुंच गया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि 2030 तक देश का निर्यात 2,000 अरब डॉलर पर पहुंच जाएगा.