यह ख़बर 08 जुलाई, 2011 को प्रकाशित हुई थी

'आय के आधार पर देश में है भारी विषमता'

खास बातें

  • देश में ऊपर और नीचे की पायदान खड़े व्यक्तियों की आय में बड़ा अंतर है। गांव और शहर के बीच भी यह विषमता स्पष्ट दिखती है।
नई दिल्ली:

देश में ऊपर और नीचे की पायदान खड़े व्यक्तियों की आय में बड़ा अंतर है। गांव और शहर के बीच भी यह विषमता स्पष्ट दिखती है। राष्ट्रीय आय पर किए गए ताजा राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (एनएसएस) में यह निष्कर्ष सामने आया है। सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2009-10 में ग्रामीण क्षेत्रों में जहां प्रति व्यक्ति औसत मासिक खर्च 1,053.64 रुपये रहा वहीं शहरी क्षेत्रों में यह 1,984.46 रुपये रहा है। सर्वेक्षण में यह बात भी सामने आई है कि सबसे ज्यादा खर्च खाने-पीने पर खर्च होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां कुल खर्च में 57 प्रतिशत खर्च खाद्य पदार्थों पर किया जाता है वहीं शहरी क्षेत्रों में 44 प्रतिशत खर्च खाद्य पदार्थों पर होता है। एनएसएस के 66वें दौर में किए गए सर्वेक्षण के अनुसार शहरी जनसंख्या का प्रति व्यक्ति खर्च का स्तर ग्रामीण जनसंख्या के प्रति व्यक्ति औसत मासिक खर्च से 88 प्रतिशत तक अधिक है। यह आकलन नई मिश्रित संदर्भ अवधि के आधार पर किया गया है। इसके मुताबिक वर्ष 2009.10 में ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति औसत खर्च 1,053.64 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 1,984.46 रुपये रहा है। सर्वेक्षण के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में देश की सबसे गरीब 10 प्रतिशत जनसंख्या का औसत मासिक प्रति व्यक्ति खर्च मात्र 453 रुपये रहा है जबकि शहरी क्षेत्रों की सबसे गरीब 10 प्रतिशत जनसंख्या का औसत मासिक खर्च 599 रुपये रहा है। देश में शीर्ष पायदान और सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति के आय स्तर पर भारी फासला है। ग्रामीण क्षेत्रों में शीर्ष 10 प्रतिशत आबादी का प्रति व्यक्ति औसत मासिक खर्च 2,517 रुपये रहा है जो कि सबसे निचले पायदान पर जीवनयापन करने वाली 10 प्रतिशत आबादी के प्रतिव्यक्ति औसत मासिक खर्च से साढे पांच गुणा अधिक है। इस बीच, शहरी क्षेत्र की शीर्ष पायदान पर जीवनयापन करने वाली 10 प्रतिशत धनी जनसंख्या का औसत प्रति व्यक्ति मासिक खर्च 5,863 रुपये रहा है यह सबसे निचले पायदान की आबादी की तुलना में 9.8 गुणा ज्यादा है।


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