यह ख़बर 22 अप्रैल, 2012 को प्रकाशित हुई थी

निर्दोष मूकदर्शकों को वैश्विक वित्तीय संकट से बचाया जाए : भारत

खास बातें

  • केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा, "इन योगदानों में उनका अस्थायी चरित्र बने रहना भी जरूरी है। उन्हें कोटा संसाधनों के एक विकल्प के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।"
वाशिंगटन:

ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान देशों को उबारने के लिए एक मजबूत सुरक्षा जाल के लिए संकल्पित 430 अरब डॉलर से अधिक की राशि के साथ अपनी ऋण देने की क्षमता दोगुनी कर दी है, भारत ने कहा है कि इस निधि में योगदान स्वैच्छिक होना चाहिए और उसे भावी प्रशासनिक सुधार से सम्बंधित नहीं होना चाहिए तथा पीड़ित निर्दोष मूकदर्शकों को उबारने में सक्षम होना चाहिए।

केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा, "इन योगदानों में उनका अस्थायी चरित्र बने रहना भी जरूरी है। उन्हें कोटा संसाधनों के एक विकल्प के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।" मुखर्जी ने यह बात तब कही जब समूह-20 और आईएमएफ-विश्व बैंक की अर्द्ध-वार्षिक बैठकों का यहां शनिवार को समापन हुआ।

मुखर्जी ने वैश्विक घटनाक्रमों के प्रति एक एकीकृत एवं परस्पर सम्बंधित प्रतिक्रिया का नेतृत्व करने का आईएमएफ से आह्वान करते हुए कहा, "यहीं पर यह भी महत्वपूर्ण है कि संकट से प्रभावित निर्दोष मूकदर्शकों, खासतौर से निम्न आय वाले देशों की उचित तरीके से हिफाजत की जाए और उनके लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रहे।"

मुखर्जी ने वैश्विक ऋणदाताओं की अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक एवं वित्तीय समिति (आईएमएफसी) में कहा, "टिकाऊ वैश्विक आर्थिक एवं वित्तीय स्थिरता के सकारात्मक बाह्यता के प्रभावी दोहन के लिए वैश्विक समन्वयन का नेतृत्व करने में आईएमएफ की एक महत्वपूर्ण भूमिका है।"

मुखर्जी ने कहा, "यह अधिक मौलिक सुधार के लिए आधार तैयार करेगा, जिससे निम्न महंगाई, बढ़ रहे व्यापार, और एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे के साथ समग्र विकास का एक पवित्र चक्र तैयार होगा, जो भावी वैश्विक वित्तीय अस्थिरता को रोकेगा और संकट के विपरीत प्रभावों का शमन करेगा।"

यूरोपीय संघ द्वारा सुरक्षा दीवार खड़ी करने के हाल के प्रयासों का स्वागत करते हुए मुखर्जी ने कहा कि यूरोपीय संघ के प्रयासों को अपने सदस्यों के लिए प्राथमिक भूमिका लगातार निभाते रहना चाहिए और आईएमएफ की सहायता यूरोपीय संघ के प्रयासों को केवल मजबूती प्रदान करने के लिए होनी चाहिए तथा निवेशकों को भरोसा बंधाने के क्रम में उसे एक उत्प्रेरक की भूमिका निभानी चाहिए।

आईएमएएफसी के अध्यक्ष, सिंगापुर के वित्त मंत्री थरमन षणमुगरतनम ने संवाददाताओं से कहा कि जहां वैश्विक सुरक्षा जाल को मजबूत करना एक महत्वपूर्ण कदम है, वहीं विश्वस्तर पर आर्थिक विकास हासिल करने के लिए राजकोषीय एवं ढांचागत सुधारों पर  मुख्य जोर बने रहना चाहिए।

आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टीन लागार्दे ने कहा कि आईएमएफ-विश्व बैंक की इस बैठक की भावना और गति ने वाशिंगटन के इस रुख को रेखांकित किया है, कि वह संकट से निपटने के एक सामूहिक समाधान को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।

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आईएमएफसी ने एक बयान में आईएमएफ की वैधानिकता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए 2010 के कोटा व प्रशासनिक सुधारों को 2012 की वार्षिक बैठक तक लागू करने की आवश्यकता दोहराई है।