खास बातें
- औद्योगिक उत्पादन जुलाई में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 0.1 फीसदी की मामूली तेजी से बढ़ा, हालांकि यह जून में दर्ज गिरावट से बेहतर है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में जून में 1.8 फीसदी गिरावट रही थी।
नई दिल्ली: औद्योगिक उत्पादन जुलाई में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 0.1 फीसदी की मामूली तेजी से बढ़ा, हालांकि यह जून में दर्ज गिरावट से बेहतर है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में जून में 1.8 फीसदी गिरावट रही थी।
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा बुधवार को जारी आंकड़े के मुताबिक विनिर्माण, खनन और पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में खराब प्रदर्शन के कारण वृद्धि दर मामूली रही।
खराब आंकड़ों के कारण सरकार ने गुरुवार को राज्य सरकारों और कारोबारी कम्पनियों के प्रतिनिधियों की एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है, जिसमें विनिर्माण क्षेत्र में तेजी वापस लाने के लिए विचार विमर्श किया जाएगा।
विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में 75.5 फीसदी योगदान रहता है। इसमें जुलाई में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 0.2 फीसदी की गिरावट रही। जून में इसमें तीन फीसदी गिरावट थी।
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में विनिर्माण क्षेत्र में मांग कम देखी जा रही है और पिछले पांच में से चार महीने में विनिर्मित वस्तुओं के निर्यात में गिरावट रही।
खनन उत्पादन में आलोच्य अवधि में 0.7 फीसदी की गिरावट रही। एक साल पहले इसमें 0.7 फीसदी वृद्धि रही थी।
निवेश का प्रमुख परिचायक पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में आलोच्य अवधि में पांच फीसदी गिरावट रही। पिछले साल की समान अवधि में इसमें 13.7 फीसदी गिरावट थी।
अप्रैल-जुलाई अवधि में पूंजीगत वस्तु उत्पादन में 16.8 फीसदी गिरावट रही, जबकि 2011-12 की समान अवधि में इसमें 8.2 फीसदी तेजी थी। बिजली उत्पादन आलोच्य अवधि में 2.8 फीसदी बढ़ा।
आधारभूत वस्तु (1.5 फीसदी), उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु (1.4 फीसदी) और उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तु (0.1 फीसदी) में भी तेजी रही।
विश्लेषकों के मुताबिक ये आंकड़े संरचनात्मक कमजोरी की ओर इशारा करते हैं और इस सुस्ती से निपटने के लिए सरकार पर तत्काल नीतिगत पहल करने का दबाव डालते हैं।
कोटक सिक्योरिटीज के दीपेन शाह ने कहा, "(औद्योगिक उत्पादन) सूचकांक में माह-दर-माह आधार पर भी गिरावट रही। पूंजीगत वस्तु (निवेश) में सुस्ती के अलावा उपभोक्ता वस्तु की तेजी भी थम रही है।"
उद्योग जगत के प्रतिनिधि संगठन भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने कहा, "ऐसे समय में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई), वित्तीय घाटा को दूर करने के उपाय, विनिर्माण नीति कार्यान्वयन जैसी घोषणाओं से काफी मदद मिल सकती है।"
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक को नीतिगत दरों में तत्काल कम से कम 50 आधार अंकों की कटौती करनी चाहिए।
फिक्की के अध्यक्ष आरवी कनोरिया ने कहा, "सकारात्मक 0.1 फीसदी विकास मायने नहीं रखता है, क्योंकि पूंजीगत और अंतरिम वस्तु श्रेणी में नकारात्मक विकास हुआ है। पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में गिरावट से पता चलता है कि आने वाले महीनों में भी औद्योगिक तेजी की गति मंद रहेगी।"
एसोचैम ने कहा कि औद्योगिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ ढीली पड़ रही है और मंदी से बचने के लिए इसकी गति उल्टी करनी होगी।
हालांकि यूरोप के सकारात्मक संकेतों के कारण शेयर बाजारों में तेजी रही और बम्बई स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक 18000 की मनोवैज्ञानिक सीमा पर कर गया।