खास बातें
- विमानन कंपनियों का निकाय आईएटीए ने दिल्ली हवाई अड्डे पर शुल्कों में वृद्धि किये जाने तथा नये हवाई अड्डों तथा संबंधित बुनियादी ढांचा मजबूत करने में देरी को लेकर भारत सरकार की आलोचना की है।
बीजिंग: विमानन कंपनियों का निकाय आईएटीए ने दिल्ली हवाई अड्डे पर शुल्कों में वृद्धि किये जाने तथा नये हवाई अड्डों तथा संबंधित बुनियादी ढांचा मजबूत करने में देरी को लेकर भारत सरकार की आलोचना की है। संगठन का कहना है सरकार को आर्थिक वृद्धि के लिये विमानन क्षेत्र को प्रोत्साहित करना चाहिए।
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) के महानिदेशक तथा मुख्य कार्यकारी अधिकारी टोनी टेलर ने कहा कि भारत का हवाई अड्डा नियामक एईआरए (हवाई अड्डा आर्थिक नियामक प्राधिकरण) ने दिल्ली हवाई अड्डे पर शुल्कों में 346 प्रतिशत वृद्धि की अनुमति दी जो ‘‘हमें अस्वीकार्य है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लि. (डीआईएएल) को अपने राजस्व का 46 प्रतिशत सरकार को देना होता है, यह न तो विमानन क्षेत्र के हित में है और न ही हवाई अड्डा के लिये।’’
यहां आईएटीए की सालाना आम बैठक को संबोधित करते हुए टेलर ने कहा कि वह जल्दी ही भारतीय अधिकारियों के साथ मिलकर इन मुद्दों पर चर्चा करेंगे। टेलर ने कहा, ‘‘..दक्षिण अफ्रीका में हवाई अड्डा नियामक ने हवाई अड्डा शुल्क में 161 प्रतिशत वृद्धि की अनुमति दी..भारत ने इसे भी पीछे छोड़ दिया और दिल्ली हवाई अड्डे पर शुल्क में 346 प्रतिशत वृद्धि की अनुमति दी और इसके कारण यह दुनिया का सबसे खर्चीला हवाई अड्डों में शामिल हो गया।’’ उन्होंने कहा भारत तथा दक्षिण अफ्रीका दोनों देशों के हवाई अड्डा नियामक जनहित की रक्षा करने में विफल रहे। हालांकि दोनों देशों के नियामकों ने उपलब्ध दिशानिर्देंशों का इस्तेमाल करते हुए हवाई अड्डा शुल्कों तथा विकास शुल्कों में वृद्धि की।
भारत तथा विश्व के अन्य देशों में विमानन बुनियादी ढांचा के बारे में टेलर ने कहा, ‘‘मुंबई में नया हवाई अड्डा (नवी मुंबई) की सख्त जरूरत है लेकिन अभी इसके लिये निर्माण कार्य शुरू भी नहीं हुआ है, ऐसे में निर्धारित लक्ष्य के मुताबिक 2014 तक इसे पूरा होने की संभावना नहीं है।
आईएटीए प्रमुख ने कहा, ‘‘एयरलाइंस क्षेत्र के विकास के लिये बुनियादी ढांचा की जरूरत है। इसकी जरूरत ठीक वैसे ही है जैसा कि कर एवं नियमन की। कुछ सरकार इसे समझते हैं और लाभ उठा रहे हैं। अन्य देश इसे नहीं समझते और इससे उनकी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है।’’ उन्होंने कहा कि सरकार को निश्चित रूप से ऐसे नियमन बनाने चाहिए जिससे संपर्क की लागत को युक्तिसंगत बनाये रखते हुए रोजगार तथा आर्थिक वृद्धि होती रहे। वैश्विक स्तर पर उद्योग के परिदृश्य को जारी करते हुए टेलर ने कहा कि वैश्विक विमानन कंपनियों का मुनाफा इस साल 3 अरब डालर रहने का अनुमान है जो 2011 में 7.9 अरब डालर तथा 2010 में 15.8 अरब डालर था।
उन्होंने यह भी कहा कि उच्च विमान ईंधन तथा वैश्विक खासकर यूरोप की आर्थिक अनिश्चितता से एशिया-प्रशांत क्षेत्र प्रभावित हो रहा है। आईएटीए की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय तथा चीनी अर्थव्यवस्था में नरमी के कारण भी वृद्धि की रफ्तार हल्की है।