खास बातें
- पहली तिमाही में विदेशी कंपनियों के कुल विलय एवं अधिग्रहण सौदों में से 61% भारतीय कंपनियों से जुड़े थे और आगे यह प्रवृत्ति जारी रहने की संभावना है।
Mumbai: वैश्विक निवेशकों के लिए भारत प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में उभरा है। चालू वर्ष की पहली तिमाही में विदेशी कंपनियों के कुल विलय एवं अधिग्रहण सौदों में से 61 फीसदी भारतीय कंपनियों से जुड़े थे और आने वाले समय में यह प्रवृत्ति जारी रहने की पूरी संभावना है। विलय एवं अधिग्रहण के बारे में सेवा देने वाली कंपनी मर्जरमार्केट के अनुसार आलोच्य तिमाही में भारत में विलय एवं अधिग्रहण से संबद्ध 57 सौदे हुए। इसमें से 35 सौदे विदेशी बोलीदाताओं से जुड़े थे। भारत में हुए कुल सौदों में से 61.4 प्रतिशत विदेशी कंपनियों से जुड़े थे, जबकि चीन और जापान के मामले में यह प्रतिशत क्रमश: 27.1 प्रतिशत और 14.3 प्रतिशत रहा। मर्जरमार्केट की उप संपादक अंजली नायक ने कहा कि 2011 की पहली तिमाही के विलय एवं अधिग्रहण सौदों को देखने से यह पता चलता है कि भारत विदेशी निवेशकों के लिए निवेश का प्रमुख गंतव्य है। ऊर्जा, बीमा और आईटी क्षेत्र निवेशकों को लुभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि घोटालों के विभिन्न मामलों के बावजूद भारत निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। इसका प्रमुख कारण यहां की बढ़ती आबादी और इसके फलस्वरूप बढ़ता बाजार है।