यह ख़बर 04 अक्टूबर, 2012 को प्रकाशित हुई थी

वायदा अनुबंध नियमन कानून संशोधन विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी

खास बातें

  • सरकार ने वायदा अनुबंध नियमन कानून संशोधन विधेयक को गुरुवार को मंजूरी दे दी। वायदा बाजार को नयी गति प्रदान करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
नई दिल्ली:

सरकार ने वायदा अनुबंध नियमन कानून संशोधन विधेयक को गुरुवार को मंजूरी दे दी। वायदा बाजार को नयी गति प्रदान करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला किया गया। बैठक के बाद वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने बताया कि यह विधेयक कमोडिटी बाजार नियामक वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) को अधिक वित्तीय स्वायत्तता के जरिये अधिकार संपन्न बनाता है। संस्थागत निवेशकों के प्रवेश में मददगार बनता है और कारोबार के लिए नये उत्पादों की पेशकश करता है।

चिदंबरम ने कहा कि इस विधेयक के संसद में पारित हो जाने के बाद एफएमसी एक्सचेंजों से शुल्क के रूप में राजस्व संग्रह कर आत्मनिर्भर बन सकता है। विधेयक के पारित होने पर एफएमसी चेयरमैन और उसके सदस्यों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 साल से बढ़कर 65 साल हो जाएगी। विधेयक में सदस्यों की संख्या 4 से बढ़ाकर 9 करने का भी प्रस्ताव किया गया है।

विधेयक में संस्थागत निवेशकों के प्रवेश की सुविधा देने का भी प्रस्ताव है जिससे विकल्प (ऑप्शन) जैसे उत्पादों के नए वर्ग को पेश करने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। इस विधेयक में डिफॉल्टरों पर जुर्माने की रकम मौजूदा 25 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है।

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इस समय, देश में पांच राष्ट्रीय और 16 क्षेत्रीय जिंस वायदा एक्सचेंज हैं। हाल ही में, एफएमसी ने यूनिवर्सल कमोडिटी एक्सचेंज को एक राष्ट्रीय एक्सचेंज के तौर पर परिचालन करने की अनुमति दी है। कमोडिटी एक्सचेंजों का सकल कारोबार चालू वित्त वर्ष में 15 सितंबर तक 80.30 लाख करोड़ रुपये रहा।