यह ख़बर 11 जून, 2012 को प्रकाशित हुई थी

अर्थव्यवस्था सुधार के लिए राजकोषीय सहायता नहीं : प्रणब

खास बातें

  • नरमी की शिकार अर्थव्यवस्था को पुन: गति प्रदान करने के लिए कोई राजकोषीय खुराक देने की संभावना से फिलहाल इनकार करते हुए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में सुधार होगा।
नई दिल्ली:

नरमी की शिकार अर्थव्यवस्था को पुन: गति प्रदान करने के लिए कोई राजकोषीय खुराक देने की संभावना से फिलहाल इनकार करते हुए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में सुधार होगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमत में कमी और मानसून के सामान्य रहने के अनुमान को उन्होंने आर्थिक संभावनाओं के लिए अनुकूल बताया।

आयकर विभाग के शीर्ष अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हम सभी आवश्यक कदम उठा रहे हैं ताकि हम सकल घरेलू उत्पाद की उच्च वृद्धि के स्तर पर पुन: लौट सकें। निश्चित तौर पर इसमें कुछ वक्त लगेगा लेकिन इस साल से हमें इसमें सुधार की उम्मीद है। भारत के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर घटकर नौ साल के निम्नतम स्तर 6.5 फीसद पर आ गई । इससे  पहले दो साल कर वृद्धि दर 8.4 फीसद थी।

इससे पहले, इस महीने मार्गन स्टैनली, सिटी और स्टैनचार्ट समेत पांच वित्तीय संस्थानों ने 2012-13 के लिए भारत की वृद्धि दर में और गिरावट का अनुमान व्यक्त किया गया। उनका मानना है कि यह 5.7 से 6.4 फीसद रहेगी। वृद्धि को प्रोत्साहित करने के लिए राजकोषीय प्रोत्साहन की संभावना को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता और नरमी का दूसरा दौर एक के बाद एक तुरंत आ गया और राजकोषीय पहल की कोई गुंजाईश नहीं बची। घरेलू उद्योग को 2008 की वैश्विक मंदी के असर से बचाने के लिए सरकार ने 1.86 लाख करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पैकेज दिया था।

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वित्त वर्ष 2011-12 के दौरान राजकोषीय घाटे के सकल घरेलू उत्पाद के 5.76 फीसद के स्तर पर पहुंचने के मद्देनजर सरकार के लिए और कर रियायत पैकेज देना संभव नहीं होगा जैसा कि उद्योग मांग  कर रहा है।