यह ख़बर 25 नवंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

खुदरा बाजार में एफडीआई निवेश पर राज्य स्वतंत्र : शर्मा

खास बातें

  • आनंद शर्मा ने कहा कि यह नीति राज्यों को लागू करनी है, जो इससे सहमत नहीं हैं उनके पास इसे लागू नहीं करने का विकल्प है।
नई दिल्ली:

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने शुक्रवार को दावा किया कि खुदरा व्यवसाय में 51 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति देने का निर्णय राज्य सरकारों और क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों के साथ विचार विमर्श के बाद किया गया है और इस पर मोटे तौर पर व्यापक सहमति है। उन्होंने साथ में यह भी कहा कि यह नीति राज्यों को लागू करनी है, जो इससे सहमत नहीं हैं उनके पास इसे लागू नहीं करने का विकल्प है। उन्होंने स्वीकार किया कि इस मुद्दे पर कुछ राज्य सरकारों ने समर्थन दिया और कुछ ने विरोध भी किया। राज्य सरकारों के पास विकल्प है, केन्द्र ने नीति बना दी है। बहुब्रांड खुदरा कारोबार में एफडीआई की अनुमति दे दी, जो राज्य सरकार अपने यहां इसे नहीं चाहते हैं वह इसे रोक सकते हैं। यह समवर्ती सूची का विषय है। शर्मा ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वह केवल राजनीति के लिये विरोध कर रहे हैं। सरकार ने इस संबंध में विभिन्न रिपोर्टों को पढ़कर और समझ कर देशहित में निर्णय लिया है। इससे किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को ही फायदा होगा। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा, हमारी नीति किसी दूसरे देश से प्रभावित नहीं है, यह नीति अपनी जरुरतों के अनुरुप तैयार की गई है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को दिल्ली में हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने बहुब्रांड खुदरा व्यापार में 51 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दे दी। इसके साथ ही एकल ब्रांड खुदरा कारोबार में शतप्रतिशत एफडीआई की भी अनुमति दे दी गई है। इसके लिये सरकार की अनुमति लेनी होगी। अभी तक विदेशी कंपनियों को एकल ब्रांड वस्तुओं का खुदरा कारोबार करने वाले उपक्रमों में अधिकतम 51 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति थी। केवल उन्हीं को एकल ब्रांड उत्पाद माना जायेगा जिनका विनिर्माण के दौरान ही ब्रांड तय कर दिया जाता है। केन्द्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंघन सरकार में सहयोगी तृणमूल कांग्रेस ने सरकार के इस निर्णय का विरोध किया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने खुदरा कारोबार में एफडीआई का विरोध किया है। तमिलनाडु में इस समय विपक्ष में बैठी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) ने भी सरकार के इस निर्णय पर चिंता व्यक्त की है। मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश के विरोध में है। उसका कहना है कि इससे छोटे व्यापारियों और किराना दुकानदारों का कामकाज प्रभावित होगा। कन्फैडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स शुरु से ही इसका विरोध करता आ रहा है। शर्मा ने कहा सभी राज्य सरकारों से बात की गई, कई ने समर्थन दिया, कुछ विरोध में भी रहे। पंजाब की अकाली दल सरकार ने केन्द्र सरकार के फैसले का समर्थन किया है। हरियाणा और कई अन्य राज्य सरकार इस निर्णय में केन्द्र के साथ हैं। पश्चिम बंगाल के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि बहुब्रांड खुदरा कारोबार के स्टोर 10 लाख अथवा इससे अधिक आबादी वाले शहरों में ही लगेंगे। पश्चिम बंगाल में इससे अधिक आबादी वाले तीन ही शहर हैं, इसलिये गांव, कस्बों में चलने वाली छोटी किराना दुकानों को इससे नुकसान नहीं होगा। वाणिज्य सचिव प्रदीप कुमार चौधरी ने बताया कि सरकार के इन निर्णयों को लागू करने के लिये अगले सप्ताह दिशानिर्देश जारी कर दिये जायेंगे और एफडीआई प्रस्तावों को मंजूरी दिये जाने की भी उम्मीद है। हालांकि, खुदरा क्षेत्र में कितना एफडीआई आ सकता है इस बारे में आनंद शर्मा और वाणिज्य सचिव ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।


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