खास बातें
- कई बड़े सौदों के चलते 2011-12 में देश में एफडीआई बढ़कर 35 अरब डॉलर हो सकता है जो पिछले वित्त वर्ष में 19.4 प्रतिशत रहा था।
नई दिल्ली: रिलायंस-बीपी तथा पोस्को सहित कई बड़े सौदों के चलते 2011-12 में देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) बढ़कर 35 अरब डॉलर हो सकता है जो पिछले वित्त वर्ष में 19.4 प्रतिशत रहा था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'मुझे एफडीआई 35 अरब डॉलर से अधिक रहने की अपेक्षा है। रिलायंस-बीपी सौदे तथा पोस्को के बड़े निवेश से यह संख्या ऊंची रहने की उम्मीद है।' अधिकारी ने कहा कि विदेशी निवेशक भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर विश्वास में है क्योंकि वैश्विक आर्थिक मंदी के दौरान भी वृद्धि दर काफी अच्छी रही। वित्त वर्ष 2008-09 और 2009-10 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर क्रमश: 6.8 प्रतिशत और 8.0 प्रतिशत रही। जबकि इस अवधि में अधिकांश वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं का प्रदर्शन इस मोर्चे पर निराशाजनक रहा था। सरकार ने बीपी पीएलसी द्वारा रिलायंस इंडस्ट्रीज के तेल एवं गैस ब्लाकों में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के सौदे को मंजूरी दे दी है। यह सौदा 7.2 अरब डॉलर का है और देश में अपनी तरह के सबसे बड़े एफडीआई प्रस्तावों में से एक है। इसी तरह पर्यावरण मंत्रालय ने कोरियाई कंपनी पोस्को को उड़ीसा में इस्पात कारखाने के लिए 12 अरब डालर के निवेशक को सशर्त मंजूरी मई में दी। मई तथा जून में देश में प्रत्यक्ष निवेश 111 व 310 प्रतिशत बढ़कर क्रमश: 4.66 अरब डॉलर तथा 5.65 अरब डॉलर हो गया। केपीएमजी के कार्यकारी निदेशक कृष्ण मलहोत्रा ने कहा, 'पिछले कुछ महीनों में वृद्धि को देखते हुए एफडीआई 35 अरब डालर के स्तर को छू सकता है।'