खास बातें
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम पिछले 18 महीने के निम्न स्तर पर आने के बावजूद तेल कंपनियां पेट्रोल के दाम नहीं घटा पा रही हैं क्योंकि उनकी नजर डालर के मुकाबले तेजी से गिरते रुपये पर है जिसकी वजह से उनका आयात महंगा हो रहा है।
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम पिछले 18 महीने के निम्न स्तर पर आने के बावजूद तेल कंपनियां पेट्रोल के दाम नहीं घटा पा रही हैं क्योंकि उनकी नजर डालर के मुकाबले तेजी से गिरते रुपये पर है जिसकी वजह से उनका आयात महंगा हो रहा है।
डालर के मुकाबले रुपया इस समय अब तक के सबसे न्यूनतम स्तर 57.30 रुपये प्रति डालर तक गिर चुका है। कच्चे तेल के दाम करीब 125 डालर की ऊंचाई से घटकर 90 डालर प्रति बैरल तक नीचे आ जाने के बाद जो लाभ हुआ था रुपये की गिरावट से वह लाभ जाता रहा।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री एस. जयपाल रेड्डी ने कहा, ‘तेल कंपनियों पूरी स्थिति से वाकिफ हैं। कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में रुपया-डॉलर की घट-बढ़ की बराबर निगरानी कर रही हैं। कंपनियां जल्द ही कोई निर्णय लेंगे।’
सरकारी तेल कंपनियां नियमित तौर पर हर महीने की पहली और 16 तारीख को पेट्रोल मूल्य की समीक्षा करती हैं। समीक्षा प्रत्येक पखवाड़े की औसत आयात मूल्य के हिसाब से की जाती हैं।
रेड्डी ने कहा, ‘कच्चे तेल और रुपये के दाम में काफी उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इससे हमें काफी राहत मिली कि कच्चे तेल के दाम नीचे आए हैं लेकिन उसी समय हमें रुपये के दाम में आई भारी गिरावट से असंतोष भी हुआ।’ उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश जहां 76 प्रतिशत पेट्रोलियम पदार्थों की पूर्ति आयात से होती है, के लिये रुपये में गिरावट काफी महत्वपूर्ण है।
सूत्रों के अनुसार इंडियन ऑयल कापरेरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और हिन्दुस्तान पेट्रोलियक कॉरपोरेशन कुछ दिन और पेट्रोल के दाम यथास्थिति में रखेंगे और बाजार का आकलन करेंगे। तेल कंपनियों ने 3 जून को पेट्रोल के दाम 2.02 रुपये लीटर कम किए थे जबकि उससे पहले 23 मई को इसमें 7.54 रुपये लीटर की वृद्धि की गई थी।