खास बातें
- बैंकरों ने कहा है कि जीडीपी वृद्धि दर में नरमी अनुमान के मुताबिक है, क्योंकि रिजर्व बैंक और आईएमएफ वृद्धि दर में गिरावट का अनुमान जता चुकी थीं।
Mumbai: बैंकरों ने कहा है कि 2010-11 की चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर में नरमी अनुमान के मुताबिक है, क्योंकि रिजर्व बैंक और आईएमएफ जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां पहले ही वृद्धि दर में गिरावट का अनुमान जता चुकी थीं। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के सीएमडी एस श्रीधर ने बताया, यह कुछ ऐसा नहीं है, जिसकी पहले से उम्मीद नहीं थी। यह रिजर्व बैंक की कई रपटों से साफ था और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान पहले ही संकेत दे चुके थे कि वृद्धि दर पिछले साल के समान नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि वृद्धि दर में नरमी आने की संभावना को देखते हुए बैंक पहले ही कई उचित कदम उठा चुके हैं। मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, 2010-11 की जनवरी-मार्च तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर घटकर 7.8 प्रतिशत पर आ गई, जो इससे पिछले वित्तवर्ष की की समान अवधि में 9.3 प्रतिशत थी। वहीं, 2010-11 के लिए कुल जीडीपी वृद्धि दर 8.5 प्रतिशत रही। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक एमवी नायर ने कहा कि लोगों को 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर को लेकर जरूरत से अधिक गंभीर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि आर्थिक वृद्धि दर कम मुद्रास्फीति के साथ मजबूत आधार पर आधारित होना चाहिए। उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक पिछले 12 महीने में रिकॉर्ड नौ बार प्रमुख दरें बढ़ा चुका है और पिछली बार 3 मई को रेपो और रिवर्स रेपो दर में आधा-आधा प्रतिशत की वृद्धि अनुमान से अधिक थी।