खास बातें
- बजट एयरलाइन स्पाइसजेट ने यात्री किरायों में कुछ सौ रुपये की वृद्धि की है और वह दैनिक आधार पर इसकी समीक्षा कर रही है।
New Delhi: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के पार जाने के साथ ही एयरलाइन कंपनियों ने विमान ईंधन एटीएफ पर बढ़ते खर्च का कुछ बोझ यात्रियों पर डालना शुरू कर दिया है। एयरलाइंस ने सरकार से मांग की है कि वह विमान ईंधन के दामों में कमी लाने के उपाय करे। बजट एयरलाइन स्पाइसजेट ने यात्री किरायों में कुछ सौ रुपये की वृद्धि की है और वह दैनिक आधार पर इसकी समीक्षा कर रही है। वहीं किंगफिशर ने भी ईंधन अधिभार में उल्लेखनीय वृद्धि की है। स्पाइसजेट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नील रेमंड मिल्स ने कहा कि कच्चे तेल की वर्तमान कीमतों के बोझ को एयरलाइंस झेल नहीं सकती हैं। मिल्स ने कहा, हमने पहले ही इसका बोझ यात्रियों पर डालना शुरू कर दिया है। हमने प्रत्येक टिकट पर कुछ सौ रुपये की वृद्धि की है। पर ईमानदारी से कहें, तो यह अभी शुरुआत है। स्थिति काफी अंतोषजनक है। मिल्स ने कहा कि इसमें से कुछ बोझ यात्रियों पर डाला जाएगा और कुछ हम उठाएंगे। उन्होंने यहां आयोजित भारत विमानन बैठक के मौके पर कहा, कच्चे तेल के वर्तमान स्तर को देखते हुए किरायों में 600 से 700 रुपये की वृद्धि जरूरी है। किंगफिशर एयरलाइंस के चेयरमैन विजय माल्या ने कहा कि हमने एटीएफ के बढ़ते दामों के बोझ को कम करने के लिए ईंधन अधिभार में उल्लेखनीय इजाफा किया है। जेट एयरवेज ने भी एटीएफ के बढ़ते दामों के बोझ को कम करने के लिए ईंधन अधिभार को समायोजित किया है। जेट एयरवेज के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी सुधीर राघवन ने कहा, हमने किराया नहीं बढ़ाया है, पर ईंधन अधिभार को एडजस्ट किया है। हम इसका बोझ यात्रियों पर डालने के लिए बाध्य हैं, क्योंकि हमारा मार्जिन घट रहा है। सभी एयरलाइंस ने सरकार से मांग की है कि वह एटीएफ पर बिक्री कर में कटौती करे। कई बार तो एटीएफ पर बिक्रीकर की दर 30 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। एयरलाइंस ने कहा है कि सरकार एटीएफ को या तो प्रस्तावित वस्तु एवं सेवा कर :जीएसटी: में शामिल करे या फिर उसे घोषित वस्तु की सूची में डाले।