यह ख़बर 13 मई, 2012 को प्रकाशित हुई थी

एयर इंडिया व इंडियन एयरलाइन्स की विलय में कहीं कुछ ‘गंभीर खामी’ : अजित

खास बातें

  • नागर विमानन मंत्री अजित सिंह ने स्वीकार किया है कि एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइन्स के विलय से जिस तरह के परिणाम की उम्मीद की गई थी, वह हासिल नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में कहीं कुछ ‘गंभीर खामी’ आ गयी है।
नई दिल्ली:

नागर विमानन मंत्री अजित सिंह ने स्वीकार किया है कि एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइन्स के विलय से जिस तरह के परिणाम की उम्मीद की गई थी, वह हासिल नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में कहीं कुछ ‘गंभीर खामी’ आ गयी है।

सिंह ने एक निजी टीवी चैनल के साथ भेंटवार्ता में सिंह ने कहा, ‘जाहिर तौर पर यह विलय उस तरह से नहीं बढ सका जैसी की योजना थी और इसमें कहीं कुछ गंभीर खामी आ गयी है। मेरा काम यह देखना है कि मौजूदा स्थिति क्या है, पुरानी गलतियों से सबक है और प्रयास करना है कि एयर इंडिया सफल हो।’ उन्होंने कहा, ‘हम सभी इस बात से सहमत हैं कि विलय उस तरह से नहीं हुआ या आगे बढा जैसा होना चाहिए था। लेकिन फिलहाल में यह तय करना है कि धर्माधिकारी समिति की रपट कैसे लागू की जाए जिसमें (दोनों कंपनियों के मानव संसाधन को समन्वित करने जैसी) इन सभी दिक्कतों का ध्यान दिया गया है।’

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यह पूछे जाने पर कि क्या विमानन प्रबंधन विलय की चुनौतियों से निपटने में समर्थ नहीं है, तो उन्होंने कहा, ‘हम प्रबंधन पर, चाहे वह वर्तमान हो या पिछला, आरोप लगाने के लिए नहीं हैं। हम यहां विमानन कंपनी की समस्याओं पर चर्चा के लिए हैं। हम जानते हैं कि विलय ठीक से नहीं हुआ।’ क्या एयर इंडिया के निजीकरण की कोई योजना है, इस बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा, ‘सबसे पहले, हमें एयर इंडिया को पटरी पर लाना है और इसके परिचालन को व्यवहारिक बनाना है।’