Pakistan Economy amid Oil-Gas Crisis: पाकिस्तान इस वक्त अपने इतिहास के सबसे काले आर्थिक दौर से गुजर रहा है. 27 मार्च की शाम तक के हालात बताते हैं कि देश अब केवल आर्थिक मंदी नहीं, बल्कि एक 'सिस्टम फेलियर' की ओर बढ़ चुका है. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने पाकिस्तान की एनर्जी लाइफलाइन (Energy Lifeline) काट दी है. वहीं दूसरी ओर संकट में मदद करते आ रहे आईएमएफ (IMF) की सख्त शर्तों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है. गिरता औद्योगिक उत्पादन और कराहती खेती ने आर्थिक रिकवरी के दावों की भी पोल खोल दी है. विशेषज्ञ अब इसे 'अस्तित्व का संकट' (Existential Crisis) करार दे रहे हैं. ऊर्जा संकट, गिरता उत्पादन, बढ़ती महंगाई और कर्ज का बोझ, इन चारों ही मोर्चों पर पाकिस्तान घिरा हुआ है.
पेट्रोल पंपों पर हाहाकार, सरकार के हाथ-पांव फूले
देश में ईंधन का संकट इस सप्ताह चरम पर पहुंच गया है. कल (27 मार्च) लाहौर और कराची जैसे बड़े शहरों के 40% पेट्रोल पंपों पर 'नो स्टॉक' के बोर्ड लटक गए. पिछले 10 दिनों के भीतर पेट्रोल की कीमतों में 62 रुपये प्रति लीटर तक की ऐतिहासिक वृद्धि की गई है, जिससे कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं.
संकट से निपटने के लिए क्या कोशिशें कर रहा पाक?
- वर्किंग डेज में कटौती: शहबाज शरीफ सरकार ने आधिकारिक तौर पर सरकारी दफ्तरों के लिए हफ्ते में 4 दिन काम का प्रस्ताव मंजूर करने की तैयारी कर ली है.
- स्मार्ट लॉकडाउन: ईंधन बचाने के लिए बड़े शहरों में स्कूलों को ऑनलाइन मोड पर शिफ्ट करने का आदेश दिया जा रहा है.
- ईंधन कोटा: सरकारी मंत्रियों और नौकरशाहों के तेल कोटे में 50% की तत्काल कटौती लागू कर दी गई है.
'ऊर्जा सुरक्षा' और वैश्विक दबाव
मध्य पूर्व के संकट ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को युद्ध क्षेत्र में बदल दिया है. 27 मार्च की क्लोजिंग तक वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया है. पाकिस्तान अपनी 99% एलएनजी (LNG) जरूरतों के लिए कतर और यूएई पर निर्भर है, लेकिन विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) इतना कम है कि वह नए कार्गो बुक करने की स्थिति में नहीं है. रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के पास अब केवल 11 दिनों का रणनीतिक तेल भंडार बचा है.
दम तोड़ता औद्योगिक इंफ्रा और खेती भी बेहाल
पाकिस्तान की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले उद्योग और खेती, दोनों ही वेंटिलेटर पर हैं. 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की ताजा रिपोर्ट के अनुसार इंडस्ट्रियल कोलैप्स वाली स्थिति बन गई है. बिजली की भारी किल्लत और कच्चे माल के आयात पर पाबंदी के कारण देश का मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट 18% तक गिर गया है. वहीं दूसरी ओर खाद की कीमतें पिछले एक साल में 300% बढ़ चुकी हैं. 27 मार्च की रिपोर्ट बताती है कि गेहूं की कटाई के सीजन से ठीक पहले डीजल की कमी ने पंजाब के किसानों को बेहाल कर दिया है.
महंगाई: प्याज 250, दूध 280 रुपये के भाव पर पहुंचा
पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (PBS) के कल के आंकड़ों के अनुसार, अल्पकालिक महंगाई सूचकांक (SPI) 45% के खतरनाक स्तर को छू रहा है. एक साधारण परिवार के लिए दो वक्त की रोटी भी अब 'लग्जरी' है. प्याज 250 रुपये और दूध 280 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है. वहीं, कैलोरी काउंट की बात करें तो विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि पाकिस्तान की 40% आबादी अब आवश्यक 2400 कैलोरी प्रति दिन प्राप्त करने में असमर्थ है.
कर्ज का अंतहीन चक्र
पाकिस्तान अब पूरी तरह से बाहरी बैसाखियों पर टिका है. 1958 से अब तक वह 26 बार IMF के पास जा चुका है. वर्तमान में जारी 7 बिलियन डॉलर का बेलआउट पैकेज भी नाकाफी साबित हो रहा है क्योंकि इसका अधिकांश हिस्सा पुराने कर्ज की किश्तें चुकाने में ही चला जाता है. देश का डेब्ट-टू-जीडीपी रेशियो अब खतरे के निशान को पार कर चुका है.
27 मार्च को इस्लामाबाद में हुई हाई-लेवल मीटिंग के बाद यह स्पष्ट है कि सरकार के पास अब विकल्प सीमित हैं. यदि खाड़ी देशों से तत्काल 'ऑयल क्रेडिट' नहीं मिला, तो अप्रैल का महीना पाकिस्तान के लिए पूरी तरह 'ब्लैकआउट' वाला हो सकता है. बढ़ती बेरोजगारी और खाद्य असुरक्षा के बीच सड़कों पर नागरिक अशांति (Civil Unrest) की आहट सुनाई देने लगी है.














