Exchange Mock Trading: आपने कभी सोचा है कि अगर किसी दिन मार्केट खुलने से ठीक पहले किसी तकनीकी समस्या के चलते बाजार नहीं खुल पाए, तो कितना निवेशकों को नुकसान होगा? आसान भाषा में कहें कि अगर बाजार के बड़े सर्वर किसी दिन डाउन हो जाएं तो फिर क्या होगा? ऐसा ना हो इसलिए बीएसई यानी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज समय-समय पर मॉक ड्रिल करता है, जिसमें सभी बड़े सर्वर के साथ सॉफ्टवेयर को टेस्ट किया जाता है कि क्या वो भारी-भरकम ट्रैफिक को संभालने की कंडीशन में हैं या नहीं.
ऐसी ही एक मॉक ड्रिल 14 मार्च को की जा रही है, जिसमें रियल ट्रांजेक्शन की जगह आर्टिफिशियल डील्स को शामिल किया जाता है. इस खबर में आपको बताते हैं इस मॉक ड्रिल के मायने क्या हैं और इसको कैसे पूरा किया जाता है.
Exchange Infrastructure Testing
कब होती है बाजार में मॉक ड्रिल?
बीएसई अमूमन मॉक ड्रि्ल को महीने के पहले शनिवार के दिन पूरा करता है. बाजार बंद रहने की वजह से इस दिन बिना किसी प्रेशर के सभी टेस्टिंग कर ली जाती हैं. इसके लिए लॉग इन टाइम सुबह 10.15 रहता है. इसके बाद शाम 4 बजे तक लगातार इसे पूरा किया जाता है.
कैसे होते हैं लेन-देन?
जैसे निवेशक आमतौर पर शेयर को खरीदते और बेचते हैं, वैसे ही मॉक ड्रिल का प्रोसेस रहता है. हालांकि इस पूरे ट्रांजेक्शन का असर निवेशकों के पोर्टफोलियो के साथ डीमैट अकाउंट पर नहीं पड़ता. ड्रिल पूरी होने के बाद सिस्टम से पेंडिंग ऑर्डर अपने आप हट जाते हैं.
लोअर और अपर सर्किट का हिसाब
उतार-चढ़ाव किसी शेयर में ज्यादा ना हो उसके लिए पहले ही 5 फीसदी का लोअर और अपर सर्किट इस्तेमाल कर लिया जाता है.
सभी ब्रोकर्स का होना जरूरी
सभी ट्रेडिग मेंबर्स के साथ बीएसई की तरफ से सभी ब्रोकर्स को इस ड्रिल में शामिल होने की जानकारी दे दी जाती है. जब ये प्रोसेस पूरा हो जाता है तब सभी ब्रोकर्स को एक्सचेंज को बताना होता है कि उन्हें इस ड्रिल के दौरान किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ा है. या फिर सिस्टम पूरी तरह से ठीक काम कर रहा है.
बीएसई चाहता है कि निवेशक बिना किसी परेशानी और रुकावट के ट्रेडिंग करते रहें. किसी भी तकनीकी समस्या का सामना उन्हें ना करना पड़े. इसके लिए बाजार की मॉक ड्रिल का रोल खास हो जाता है.














