PF में 1,800 रुपये ही कटने वाले नियम को CA से समझ लीजिए, सैलरी कितनी भी हो फर्क नहीं पड़ता

चार्टर्ड अकाउंटेंट से जानिए क्या है ईपीएफओ का 15,000 रुपये की बेसिक सैलरी वाला नियम, इससे कर्मचारियों और कंपनियों को क्या फायदा-नुकसान होगा और आपके लिए क्या है सही ऑप्शन.

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EPFO के नए नियम के अनुसार 1800 रुपये/महीने से ऊपर पीएफ जमा करना कर्मचारी पर निर्भर करेगा.
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चाहे 50 हजार की सैलरी हो या 5 लाख, ईपीएफओ के नए नियम के अनुसार अब पीएफ केवल 1800 रुपये ही कटेगा. यानी कंपनी अपने कर्मचारी के लिए पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन केवल 1800 रुपये हर महीने पर लॉक कर सकती है. फिर चाहे ही आपकी बेसिक सैलरी कितनी भी क्यों ना हो. इस पूरे मसले को समझने के लिए हमने टैक्स एक्सपर्ट सीए राजा मंगला से बात की. उनसे पूछा कि इस नए नियम आने के बाद कर्मचारी या कंपनी, किसे ज्यादा फायदा या नुकसान होगा. साथ में कर्मचारी कैसे फैसला ले कि उसे कितना पीएफ में कंट्रीब्यूट करना चाहिए.  आइए आसान भाषा में समझते हैं कि ये नियम क्या है, इससे पहले क्या व्यवस्था थी.

क्या है 1800 रुपये वाला नियम?

फायदे नुकसान समझने से पहले जानते हैं कि ईपीएफओ (EPFO) के नियम के अनुसार क्या बदला है.  किसी भी कर्मचारी के प्रोविडेंट फंड  की कैलकुलेशन उसकी बेसिक सैलरी और डीए पर होती है, नियम के अनुसार, कर्मचारी और कंपनी दोनों को बेसिक सैलरी का 12-12% हिस्सा पीएफ में जमा कराना होता है. सीए राजा मंगला ने बताया कि, लेकिन, यहां पर एक बात समझने की है, सरकार ने 15 हजार रुपये प्रति महीने की सीमा पीएफ के लिए रखी है. यानी हम 15,000 रुपये का 12% निकालते हैं, तो वह 1,800 रुपये बनता है और नियम के अनुसार कंपनियां इस 15,000 की लिमिट को बेस मानकर आपका और अपना कंट्रीब्यूशन 1800 रुपये/महीने पर फिक्स कर सकती हैं, भले ही आपकी बेसिक सैलरी 1 लाख रुपये क्यों ना हो. इसके ऊपर पीएफ काटना पूरी तरह से कर्मचारी पर और कंपनी की पॉलिसी पर डिपेंड करता है.

पहले क्या नियम था और इसकी जरूरत क्यों पड़ी?

सीए राजा मंगला के अनुसार पीएफ काटने की शुरुआत कर्मचारियों को सेफ्टी और रिटायरमेंट फंड देने के लिए हुई थी. तब नियम था कि जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 15,000 रुपये या उससे कम है, उनके लिए ईपीएफ से जुड़ना जरूरी है. अब क्योंकि 15 हजार रुपये की सैलरी पर 12% के हिसाब से 1800 रुपये ही बनते हैं, इसलिए बाद में ये स्टैंडर्ड सीलिंग बन गया. टाइम के साथ कर्मचारियों की सैलरी बढ़ी, फिर भी मिनिमम लिमिट 1800 रुपये पर ही सेट रही.

इस नए नियम से पहले कंपनी को कर्मचारी के बराबर पीएफ में कंट्रीब्यूट करना होता था. लेकिन अब कंपनी को छूट है कि वो 1800 रुपये से ज्यादा पीएफ जमा करे या नहीं. 

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कंपनी को इस नियम से फायदा या नुकसान?

टैक्स एक्सपर्ट सीए राजा मंगला बताते हैं कि, कंपनियों के लिए ये नया नियम एक बड़ा कॉस्ट-कटिंग और सैलरी कस्टमाइजेशन के तौर पर आया है. फायदे की बात करें तो कंपनी को अपने हिस्से का भी केवल 1800 रुपये ही कर्मचारी के पीएफ में डालना होता है. पर मान लीजिए अगर कंपनी पूरी बेसिक सैलरी पर 12% देती, तो उसे ज्यादा पीएफ देना होता. मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 50 हजार रुपये है, तो कंपनी को पीएफ के लिए 6,000 रुपये भरने होते. अब इस नए नियम के बाद कंपनी हर कर्मचारी पर 4,200 रुपये बचा सकेगी. इससे कंपनी का कॉस्ट टू कंपनी बजट कंट्रोल में रहेगा.

हालांकि सीए मंगला के अनुसार इस नियम से कंपनी को सीधे तौर पर कोई नुकसान तो नहीं है. पर जो कर्मचारी ज्यादा पीएफ जमा करना चाहते हैं वो कम पीएफ काटने वाली कंपनियों को छोड़ सकते हैं

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कर्मचारी को नए नियम से फायदा?

यहां सिक्के वाली परिभाषा लागू होती है, यानी हर बात के दो पहलू होते हैं.  पहले फायदे वाले पहलू की बात करते हैं. सीए राजा मंगला के अनुसार अगर पीएफ 1800 रुपये कटेगा तो कर्मचारी की टेक होम सैलरी बढ़ जाएगी. यानी लोन लेने या अपना मनपसंद निवेश करने के लिए कर्मचारी के पास ज्यादा कैश होगा. निवेश की बात करें तो सीए मंगला के अनुसार बचे हुए पैसे को कर्मचारी म्यूचुअल फंड के साथ इक्विटी या स्मॉलकैप में लगा सकते हैं. और मौजूदा पीएफ की 8.25 की दर से ज्यादा रिटर्न बना सकते हैं. 

कर्मचारियों को नुकसान?

दूसरा पहलू जुड़ा है कर्मचारियों के नुकसान से. एक्सपर्ट सीए राजा मंगला ने बताया कि पीएफ में जमा पैसे पर कंपाउंडिंग इंटरेस्ट का फायदा मिलता है. ऐसे में फंड कम होगा तो रिटायरमेंट पर मिलने वाला पैसा भी कम ही रहेगा. इसके साथ ही एक बात पेंशन को लेकर भी है. कंपनी के 12% हिस्से में से 8.33% हिस्सा कर्मचारी पेंशन स्कीम में जाता है. अब अगर कंट्रीब्यूशन ही 1800 रुपये महीने का रहेगा तो रिटायरमेंट के बाद महीने की पेंशन भी कम बन पाएगी.

अब कितना पीएफ जमा करें?

सीए राजा मंगाला के अनुसार, इसका सीधा जवाब नहीं है. कितना पीएफ कटवाना है, ये कर्मचारी की क्षमता पर ही निर्भर करेगा. हां अगर आपकी उम्र अभी 30 के नीचे है, रिस्क प्रोफाइल है और बचे हुए पैसों को SIP या इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम में निवेश करना चाहते हो तो 1800 रुपये की लिमिट बेस्ट हो सकती है. वहीं, ज्यादा रिस्क लेना नहीं चाहते, मार्केट से दूर रहते हैं और एक बड़ा रिटायरमेंट फंड चाहते हैं, तो पूरी बेसिक सैलरी पर पीएफ कटवाना चाहिए. 

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