Rupee at All Time Low: क्‍या और गिरेगा रुपया? एक्सपर्ट से समझें क्‍यों आपके लिए है खतरे की घंटी

INR USD Exchange Rate:भारतीय रुपया अभी दबाव में है और एक्सपर्ट्स के अनुसार इसमें आगे और गिरावट की संभावना बनी हुई है. हालांकि RBI की मौजूदगी इसे संभाल सकती है, लेकिन कच्चे तेल की कीमतें और ग्लोबल हालात तय करेंगे कि रुपया आगे गिरता है या नहीं.

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USD vs INR: रुपये की कमजोरी का असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ता है.
नई दिल्ली:

भारतीय रुपये में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. मिडिल ईस्ट (Middle East) में जारी संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने घरेलू करेंसी पर जबरदस्त दबाव बनाया है.आज यानी बुधवार सुबह शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले (Rupee vs Dollar) यह 3 पैसे गिरकर 92.43 प्रति डॉलर पर पहुंच गया. मिडिल ईस्ट में जारी तनाव (Middle East Tensions), कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें (Crude Oil Price) और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने रुपये को कमजोर किया है. ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या गिरावट यहीं रुकेगी या अभी और कमजोरी देखने को मिल सकती है.

आज रुपया क्यों गिरा? जानिए बड़ी वजहें

इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 92.42 पर खुला और थोड़ी गिरावट के साथ 92.43 तक पहुंच गया. इससे पहले मंगलवार को यह 92.47 के इंट्रा-डे लो तक गया था और 92.40 के ऑल-टाइम लो पर बंद हुआ.

फॉरेक्स ट्रेडर्स का कहना है कि रुपये पर दबाव कई वजहों से बना हुआ है. विदेशी निवेशकों का पैसा लगातार निकल रहा है, डॉलर मजबूत हो रहा है और मिडिल ईस्ट में चल रहे संकट से अनिश्चितता बढ़ी है. हालांकि घरेलू शेयर बाजार में अच्छी शुरुआत और ग्लोबल क्रूड में हल्की गिरावट ने रुपये की गिरावट को और ज्यादा बढ़ने से रोका है.

क्या रुपया और नीचे जा सकता है? जानें एक्सपर्ट की राय

सीनियर कमोडिटी एक्सपर्ट और केडिया एडवाइजरी के MD अजय केडिया के मुताबिक, रुपये में गिरावट की संभावना अभी भी बनी हुई है. उनका कहना है कि इस समय करेंसी मार्केट काफी उथल पुथल जैसी स्थिति से गुजर रहा है, जहां कई फैक्टर एक साथ रुपये पर दबाव डाल रहे हैं.

उनका कहना है कि भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए कीमत बढ़ने पर ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ती है और इससे रुपया कमजोर होता है. इसके अलावा, दुनिया भर में अनिश्चितता  के समय निवेशक सुरक्षित माने जाने वाले डॉलर की ओर रुख करते हैं, जिससे उभरते बाजारों से पैसा निकलता है. इसके साथ ही, महंगे आयात की वजह से ट्रेड डेफिसिट बढ़ता है, जो रुपये पर एक्स्ट्रा दबाव डालता है.

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अजय केडिया के अनुसार, अगर USDINR 91.80 के ऊपर बना रहता है तो यह 92.80 और उसके बाद 94.20 के स्तर तक भी जा सकता है.

कच्चा तेल 100 डॉलर के पार रहा तो बढ़ेगी चिंता

अजय केडिया का कहना है कि जब तक कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना रहेगा, तब तक भारत के लिए चिंता बनी रह सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने कुछ हद तक अल्टरनेटिव सप्लाई की ओर रुख किया है, लेकिन ग्लोबल मार्केट में तेजी सिर्फ सप्लाई की कमी से नहीं बल्कि लॉजिस्टिक्स की दिक्कतों की वजह से भी बनी हुई है. ऐसे में रुपये पर दबाव आगे भी जारी रह सकता है और यह 94.20 के स्तर तक जा सकता है.

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क्या RBI रुपये में जारी गिरावट को रोक सकता है?

हालांकि एक पॉजिटिव पहलू यह है कि भारतीय रिजर्व बैंक के पास मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है. आमतौर पर जब रुपया तेजी से गिरता है, तो RBI डॉलर बेचकर मार्केट में दखल देता है और रुपये में जारी गिरावट को संभालने की कोशिश करता है. ऐसे में यह माना जा रहा है कि गिरावट जारी रह सकती है, लेकिन पूरी तरह से फ्री फॉल जैसी स्थिति बनने की संभावना कम है.

आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?

रुपये की कमजोरी का असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ता है. जब रुपया गिरता है तो महंगाई बढ़ने लगती है क्योंकि पेट्रोल-डीजल महंगे हो जाते हैं और इसका असर रोजमर्रा के खर्च पर भी दिखता है. इसके अलावा, मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे इंपोर्टेड सामान भी महंगे हो जाते हैं. वहीं, जो लोग विदेश यात्रा या पढ़ाई की योजना बना रहे हैं, उनके लिए खर्च और बढ़ जाता है क्योंकि डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो जाता है.

भारतीय रुपया अभी दबाव में है और एक्सपर्ट्स के अनुसार इसमें आगे और गिरावट की संभावना बनी हुई है. हालांकि RBI की मौजूदगी इसे संभाल सकती है, लेकिन कच्चे तेल की कीमतें और ग्लोबल हालात तय करेंगे कि रुपया आगे गिरता है या नहीं.
 

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