देश में खुदरा महंगाई दर छह साल के सबसे निचले स्‍तर पर पहुंची, थोक महंगाई दर में भी गिरावट

सांख्यिकी मंत्रालय के ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, जून 2025 में ऑल इंडिया उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति दर जून 2024 की तुलना में 2.10% रिकॉर्ड की गई है.

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  • जून 2025 में देश की खुदरा महंगाई दर पिछले छह सालों के सबसे निचले स्तर पर पहुंचकर 2.10 प्रतिशत रिकॉर्ड की गई है.
  • थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित वार्षिक मुद्रास्फीति दर जून 2025 में नकारात्मक होकर शून्य से नीचे -0.13 प्रतिशत रही.
  • खाद्य पदार्थों, खनिज तेलों, मूल धातुओं, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतों में कमी के कारण थोक महंगाई दर में गिरावट आई है.
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नई दिल्‍ली :

देश में खुदरा महंगाई दर पिछले छह साल में सबसे निचले स्‍तर पर पहुंच गई है. सांख्यिकी मंत्रालय के ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, जून 2025 में ऑल इंडिया उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित मुद्रास्फीति दर जून 2024 की तुलना में 2.10% रिकॉर्ड की गई है. मई 2025 की तुलना में जून 2025 की मुख्य मुद्रास्फीति दर में 72 बेसिस पॉइंट की गिरावट दर्ज हुई है. जनवरी 2019 के बाद से यह सबसे कम वार्षिक मुद्रास्फीति दर है. 

देश में थोक महंगाई दर में भी गिरावट दर्ज की गई है. सोमवार को वाणिज्य मंत्रालय ने थोक महंगाई दर पर जारी अपनी रिपोर्ट में कहा, "(देश में) थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index - WPI) पर आधारित मुद्रास्फीति की वार्षिक दर जून 2025 (जून 2024 की तुलना में) के लिए (-) 0.13 प्रतिशत है. जून, 2025 में मुद्रास्फीति की नकारात्मक दर मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों, खनिज तेलों, मूल धातुओं के निर्माण, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस आदि की कीमतों में कमी के कारण है... जून 2025 के लिए डब्ल्यूपीआई में माह-दर-माह परिवर्तन मई 2025 की तुलना में (-) 0.19 प्रतिशत रहा". 

उद्योग जगत ने किया स्वागत

उद्योग जगत ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में महंगाई दर में दर्ज गिरावट का स्वागत किया है. उद्योग संघ PHDCCI के अध्यक्ष हेमंत जैन ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा, "दिसंबर 2024 से थोक मूल्य सूचकांक (WPI) मुद्रास्फीति में लगातार गिरावट भारत में उच्च आर्थिक विकास के लिए सकारात्मक संकेत है.

बिजनेस सेंटिमेंट में सुधार: जैन

उन्‍होंने कहा कि WPI मुद्रास्फीति दिसंबर 2024 के 2.57% से घटकर जून 2025 में (-) 0.13% हो गई है, जिससे बिजनेस सेंटीमेंट में सुधार हुआ है. इससे कंपनियों की परिचालन लागत (operational costs) कम होने, घरेलू मांग (domestic demand) और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है".

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