जोधपुर से पचपदरा की ओर बढ़ते हुए, सांभरा गांव के पास सड़क के दाईं ओर पाइपलाइन और औद्योगिक ढांचे की भव्य संरचना नजर आती है. दूसरी ओर एक बड़ा स्कूल भवन, निर्माणाधीन अस्पताल, होटल-रेस्टोरेंट और गांव के प्रवेश द्वार पर स्वागत करता हुआ गेट दिखाई देता है. इसके पास ही एक बोर्ड लगा है जिस पर लिखा है, " सांभर गांव के लिए यह सड़क HPCL राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड के द्वारा बनाई गई है." जैसे ही आप गांव की सड़क पर आगे बढ़ते हैं, एक और बोर्ड दिखता है. इस बोर्ड पर रिफाइनरी का लोगो है. इससे पता चलता है कि स्कूल और अस्पताल का निर्माण भी रिफाइनरी के सहयोग से हो रहा है. यह दृश्य इस क्षेत्र में आए बदलाव और विकास की कहानी को बयां करता है.
pachpadra hpcl refinery
पीएम मोदी करेंगे एचपीसीएल रिफाइनरी का उद्घाटन
4 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी पचपदरा आकर एचपीसीएल रिफाइनरी का उद्घाटन करेंगे. यह परियोजना भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है और साथ ही क्षेत्र के लोगों के लिए नए अवसर और बेहतर जीवन की उम्मीद लेकर आई है. एचपीसीएल की यह रिफाइनरी देश की पहली ग्रासरूट इंटीग्रेटेड रिफाइनरी-कम-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स है. रिफाइनरी से सालाना 9 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन हो सकेगा. 1.5 मिलियन टन कच्चा तेल राजस्थान के मंगला टर्मिनल से आएगा और 7.5 मिलियन टन आयातित तेल होगा. इसके अलावा यह रिफाइनरी बिटुमेन, नैफ्था जैसे कई अन्य उत्पाद भी तैयार करेगी.
मुंद्रा पोर्ट से सीधा कनेक्शन, बढ़ेगी तेल निर्यात क्षमता
ये रिफाइनरी भारत की दूसरे देशों पर निर्भरता को और कम करने के साथ देश की तेल निर्यात करने की क्षमता बढ़ाएगी. 487 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए रिफाइनरी को सीधा मुंद्रा पोर्ट से कनेक्ट किया गया है. रूस और खाड़ी देशों से आयातित तेल सीधा यहां रिफाइन होने आ सकेगा. रिफाइनरी से जहां एक ओर राजस्थान सरकार को 5 हजार करोड़ की सालाना आय होगी तो वहीं स्थानीय लोगों का जीवन भी बेहतर हो रहा है.
'रिफाइनरी के आने से मिला रोजगार'
जोधपुर के ओसियां का धर्मेंद्र रिफाइनरी की स्कूल में गार्ड की नौकरी करता है. पहले रिफाइनरी के गेट पर लगा था. धर्मेंद्र ने बताया कि रिफाइनरी आने से रोजगार मिला है. इसलिए मैं यहां आया हूं नौकरी करने के लिए, समय पर तनख्वाह मिल जाती है. हॉस्पिटल, स्कूल बने हैं. खूब फायदा हुआ है. सांभरा गांव में रहने वाला राणा रिफाइनरी में पानी सप्लाई का काम करता है. इस नौकरी में काम के निश्चित घंटे है और पैसा समय पर मिल जाता है. इस कमाई से मोटरसाइकिल खरीदी है. बहन पार्वती भी रिफाइनरी में ही खाना बनाने का काम करती है. राणा ने बताया कि पहले वे नमक की खानों में मजदूरी करने जाते थे. गाड़ी में नमक की बोरियां लादने का काम था. सुबह 9 बजे जाते रात को 12 - 1 बजे तक काम करके लौटते थे. लेकिन बस 120 या 150 रुपए मजदूरी मिलती थी. अब 18 हजार रुपए महीने कमा लेते हैं. गांव में मीठे पानी की सप्लाई भी अब होने लगी है.
'अब घर बैठे ही मिठा पानी मिल रहा'
गांव के ही राजाराम बताते हैं कि पहले एक हजार रुपए देकर पानी की टंकी मंगवानी पड़ती थी. अब घर पर ही मीठा पानी आ जाता है. क्योंकि अब पाइपलाइन बिछवा दी गई है. रिफाइनरी से महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर खुले हैं. बाहर के लोग यहां रहते है तो कमरा किराए पर लेते हैं. स्थानीय दुकानदारों से सामान खरीदते हैं. इससे भी लोगों की आमदनी बढ़ी है. पाली के गढ़वाड़ा से रवीना अपनी बहन पूजा के साथ काम करने आई है. गांव में काम नहीं मिलता. घर पर भाई कमाने वाला था, उसकी हत्या हो गई. दोनों बहने यहां कमाती है. 12 वीं पढ़ी है. गांव में कोई काम नहीं था. रवीना ने बताया कि रिफाइनरी नहीं होती तो हमको काम नहीं मिलता. हम गांव में बेरोजगार रहते. रिफाइनरी की टाउनशिप में काम करते हैं. हम दोनों बहने ही यहां पर नौकरी कर रही हैं. किराए पर मकान लिया है.
गांव के लोगों से बात करने पर पता चलता है कि इस रिफाइनरी ने इस क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है. राजस्थान के इस भूभाग की शुष्क जलवायु और पानी की कमी के कारण खेती और पशुपालन की संभावनाएं सीमित है. रोजगार के अवसर भी कम है, जिनमें आय भी निश्चित नहीं है. रिफाइनरी ने न केवल स्थायी रोजगार के नए रास्ते खोले हैं, बल्कि स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा दिया है और कई परिवारों के लिए सुरक्षित भविष्य की नींव रखी है.